बैंकिंग सेक्टर में सुधारों के लिए केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय समिति बनाई है। पूंजी, बैंकिंग नियमों, AI, साइबर सुरक्षा और कर्ज वितरण की समीक्षा होगी।
नई दिल्ली: क्या आपका बैंक अकाउंट भी आने वाले दिनों में पूरी तरह बदलने वाला है? भारत सरकार ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक ऐसा बड़ा कदम उठया है, जिसके बाद देश के हर बैंक, एटीएम और आपके मोबाइल पर चलने वाले बैंकिंग ऐप्स का नक्शा ही बदल जाएगा। 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने को सच करने के लिए सरकार ने एक ऐसी हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो बैंकिंग सिस्टम की चूलें हिलाकर रख देगी। आइए जानते हैं इस महा-बदलाव के अंदर की पूरी कहानी।
कमान किसके हाथों में? कौन हैं वो दिग्गज जो तय करेंगे बैंकों का भविष्य?
इस भारी-भरकम बदलाव के लिए सरकार ने देश के सबसे तेज-तर्रार और दिग्गज चेहरों को मैदान में उतारा है। इस पूरी योजना की कमान संभालने के लिए पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) सुरेश एन. पटेल को इस उच्च स्तरीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
अकेले सुरेश एन. पटेल ही नहीं, बल्कि इस कोर टीम में ऐसे नाम शामिल हैं जिनके नाम से ही बैंकिंग गलियारों में हलचल मच जाती है:
शिरीष चंद्र मुर्मू (उप-गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक)
पद्मजा चुंदरू (पूर्व MD & CEO, इंडियन बैंक)
एन. एस. विश्वनाथन (पूर्व उप-गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक)
इसके अलावा वित्तीय सेवा विभाग के बैंकिंग प्रभारी संयुक्त सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे।
मात्र 6 महीने के कार्यकाल वाली यह कमेटी तय करेगी कि आने वाले समय में देश के बैंक कैसे काम करेंगे।
AI, डिजिटल क्रांति और साइबर खतरे: अब फोन पर बैंकिंग होगी या कुछ और?
आज के दौर में जब हर कोई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर रहा है, तो सुरक्षा और तकनीक सबसे बड़ा सवाल बन गई है। इस कमेटी के एजेंडे में साफ है कि बैंकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल नवाचार को इस तरह से घुसाया जाएगा कि बैंकिंग चुटकियों में हो जाए।
लेकिन, इसके साथ ही साइबर ठगों और डेटा चोरी के खतरों से निपटने के लिए एक अचूक सुरक्षा कवच का रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। बैंक सिर्फ पैसे रखने की जगह नहीं, बल्कि हाई-टेक डिफेंस जोन बनने जा रहे हैं।
प्राइवेट निवेश और पैसों की किल्लत का होगा खेल खत्म
क्या आपको बिजनेस शुरू करने के लिए महंगे ब्याज पर कर्ज मिलता है? इस कमेटी का एक सबसे बड़ा काम यह जांचना है कि आखिर कारोबारियों को मिलने वाली पूंजी की लागत में इतना अंतर क्यों है।
बैंकों की लंबी अवधि की पूंजी जरूरतों, डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (DFIs) और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) की सेहत सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। मकसद साफ है—देश में प्राइवेट निवेश को ऐसा रॉकेट बूस्टर देना कि अर्थव्यवस्था सरपट दौड़ने लगे।
ग्रामीण बैंकों से लेकर लीड बैंक योजना तक… अब सब होगा डेटा-बेस्ड
गाँवों और छोटे शहरों में चलने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) और सहकारी बैंकों के नियमों में भी बड़ा फेरबदल होने वाला है। प्रायोरिटी सेक्टरLेंडिंग (PSL) यानी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और ‘लीड बैंक योजना’ की अब नए सिरे से समीक्षा होगी।
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के आखिरी कोने में बैठे व्यक्ति तक कर्ज और वित्तीय सुविधाएं बिना किसी झंझट के पहुंचें। कुल मिलाकर, भारत का बैंकिंग ढांचा अब पूरी तरह डेटा-आधारित और आधुनिक होने जा रहा है, जिससे आम आदमी के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।
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