सरकारी सेवा से होकर निवृत्त प्रभु भजन में अब होना है रत घड़ी की टिक-टिक से होकर मुक्त अब जीवन जीना है उन्मुक्त सारे बंधन अब होंगे अस्त घर में अपने रहेंगे मस्त
सी एल, पी एल की टेंशन से दूर जब मर्जी हो करेंगे टूर नहीं तबादले की होगी फिक्र न टाइम बाउण्ड प्रोग्राम का कोई जिक्र नाती- पोतों संग जी भर खेलेंगे बचपन अपना फिर से जी लेंगे
सच्चे साथियों संग बढ़ा कर प्रीत मिल कर निभायेंगे अब हर रीत प्रभावी छवि की न रहेगी भूख सेवानिवृत्ति का बड़ा है सुख।
(लेखिका राजकीय महाविद्यालय, नाथद्वारा, राजसमन्द में प्राणीशास्त्र की सह आचार्य हैं)