नई परिभाषा …

एक मार्मिक लघु कथा जिसमें मजदूर दिवस की असल सच्चाई सामने आती है। पेंटर के शब्दों में जानिए क्यों मजदूर के लिए छुट्टी नहीं, बल्कि पूरी मजदूरी ही सबसे बड़ा त्योहार है।

लघु कथा 

डॉ. शिखा अग्रवाल 


पिछले पांच दिन से अनीशा के फ्लैट में पेंट हो रहा था। पेंटर पहले दीवारों की घिसाई करते फिर पेंट करते। घिसाई से उड़ी धूल से बचने के लिए सोफा, पलंग और सारे सामान को चादर डाल कर ढक रखा था। सोसाइटी ने जिस ठेकेदार को काम दिया था वह बहुत कड़क था। भीषण गर्मी में भी काम के एक एक मिनट का हिसाब रखता था।

पुराना PF अब नहीं रहेगा ‘लापता’ | बिना UAN वाले अकाउंट भी होंगे एक्टिव, EPFO ला रहा नया डिजिटल हथियार

एक मई के दिन जब वह पेंटर काम पर आ गया तो अनीशा को बहुत आश्चर्य हुआ। “आज तुम्हारी छुट्टी नहीं है” उसने पेंटर से पूछा। ” किस बात की छुट्टी ?” पेंटर ने सवालिया निगाहों से उसे देखते हुए पूछा। ” आज एक मई है, मजदूर दिवस। आज की तो तुम्हें छुट्टी मिलनी चाहिए” अनीशा ने उसे बताया। ” मजदूर को बिना काम के कौन पैसा देता है आंटी जी। और पैसे की जरूरत तो हर दिन होती है क्योंकि रोटी तो हर दिन चाहिए ना। जब रोटी की छुट्टी नहीं हो सकती तो हमारी कैसे होगी भला। हमारे लिए तो वही दिन मजदूर दिवस है जिस दिन की पूरी मज़दूरी मिल जाए और शाम को परिवार के साथ भरपेट खाना खा लें।” पेंटर ने अनीशा को मजदूर दिवस की नई परिभाषा समझा दी।

(लेखिका राजकीय महाविद्यालय, सुजानगढ़ (चूरू) की सेवानिवृत्त सह आचार्य हैं)

—————————-

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

गाड़ियां अब करेंगी ‘बात’ और सड़क देगी पहले ही खतरे का अलर्ट | V2X टेक्नोलॉजी से बदलने वाला है भारत का ड्राइविंग सिस्टम

बैंक की एक लाइन… और कब्र तक पहुंच गया भाई! | 20 हजार के लिए बहन का कंकाल कंधे पर रख बैंक में जा धमका

अब नहीं आएगा बुढ़ापा? | शरीर की ‘एजिंग मशीन’ बंद करने वाली जीन दवा पर बड़ा खुलासा

नई हवा’ की  खबरें  नियमित  और अपने मोबाइल पर डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए  व्हाट्सएप नंबर  9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें