रिश्तों की बदलती मिठास, अकेलेपन की पीड़ा और दुनिया की मतलबी सच्चाई को बयान करती एक भावुक कविता। जीवन के अनुभवों और टूटते रिश्तों पर आधारित मार्मिक अभिव्यक्ति।
सीए विनय गर्ग ‘मोहित’, भरतपुर
कभी कभी अनजानी राहों पर निकल जाने का दिल करता है, जब पहचानी राहें अनजानों का सा व्यवहार करती हैं।।
उन रिश्तों से दूर जाने का दिल करता है, जिन रिश्तों में अब पहले से मिठास नहीं है।।
उन अपनों से दूर जाने को दिल करता है, जिनके अन्दर अब पहले सा अपनापन शेष नहीं है।।
और,
कभी कभी अपने में डूब जाने का दिल करता है, क्यूँ कि शायद ज़माने में कोई अपना नहीं है।।
ये दुनिया मतलबी है दोस्तो, इसलिए अपना और अपनों का ख्याल रखिए।।
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