बारिश से अपना लैपटॉप बचाने की चिंता में खड़ा एक कॉरपोरेट कर्मचारी, कुछ गरीब बच्चों की मासूम खुशियां देखकर अपने बचपन में लौट जाता है। डॉ. शिखा अग्रवाल की यह लघुकथा जीवन की छोटी-छोटी खुशियों का बड़ा संदेश देती है।
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नई परिभाषा …
एक मार्मिक लघु कथा जिसमें मजदूर दिवस की असल सच्चाई सामने आती है। पेंटर के शब्दों में जानिए क्यों मजदूर के लिए छुट्टी नहीं, बल्कि पूरी मजदूरी ही सबसे बड़ा…
मंदिर में छोटी सी प्रार्थना, और भर आई दादाजी की आंखें | पांच साल की अनाया बोली – ‘भगवान जी, पापा को अब घर भेज दो’
पांच साल की अनाया मंदिर में भगवान से ऐसी प्रार्थना करती है जिसे सुनकर दादाजी की आंखें भर आती हैं। मासूम बच्ची का अपने पिता के लिए प्यार और इंतजार दिल को छू लेने वाली कहानी बन जाता है।
