न थोपें उन पर अपने सपनों का पहाड़

फिर से आ गया परीक्षाओं का मौसम
चलो बनाएं तनाव मुक्त “इकोसिस्टम”

मेरी सारी वांछित देह, लांछनों की…

मेरी सारी वांछित देह
लांछनों की
दहकती सलाखों से

मेरी सारी वांछित देह, लांछनों की…

मेरी सारी वांछित देह
लांछनों की
दहकती सलाखों से

 पोषित करें सद्भाव…

ये दुनिया नहीं है विश्राम स्थल
अभीष्ट कर्मों का ये कर्म स्थल
अद्वितीय इसका हर एक कण
इनके सदुपयोग का लें हम प्रण

 पोषित करें सद्भाव…

ये दुनिया नहीं है विश्राम स्थल
अभीष्ट कर्मों का ये कर्म स्थल
अद्वितीय इसका हर एक कण
इनके सदुपयोग का लें हम प्रण

बसंती बयार…

कल तक सूने खड़े वृक्ष की,
नव पल्लव ने झोली भर दी।

ओस की बिंदिया सजाकर…

जब अघाने छेड़ते हैं, बात मेरे गांव की।
हृदय के गहराव में इक, धूल के ठहराव की।

ओस की बिंदिया सजाकर…

जब अघाने छेड़ते हैं, बात मेरे गांव की।
हृदय के गहराव में इक, धूल के ठहराव की।

दरपन मन टूक टूक हो गया…

कुहरे की छाँव घनी हो गई
पुरबइया नाग फनी हो गई
दरपन मन टूक टूक हो गया

लॉ के प्रोफ़ेसर साहब ने स्टूडेंट्स को ऐसे सिखाया सबब 

लाॅ की क्लास में लेक्चरर ने एक छात्र को खड़ा करके उसका नाम पूछा और बिना किसी वजह के उसे क्लास से निकल जाने का कह दिया। छात्र ने कारण जानने और