मनोभावों की अभिव्यक्ति है कविता

क्रोध, करूणा, दया, प्रेम, भक्ति, हास्य
सभी मनोभावों की अभिव्यक्ति है कविता ।
कार्य प्रवृत्ति हेतु प्रेरित कर

अंगड़ाता है बुढ़ापा यौवन की अर्थी पर…

झंझाओं का महानाद
कवलित काल
ऐसे न थमेगा

हो चुका है प्यार काफ़ी…

फेंक दो
अपनी पुरानी कल्पनाओं के कफ़न कवि!

मैं था हवा खोर…

सफ़ेद धुला
मलमल का कुर्ता पहने
मैं टहल रहा था।

हंसी जिंदगी की सरगम…

जब भी मन पर छाए उदासी
खुद से ही कर लेना हाँसी
हंसी जिंदगी की सरगम है

भविष्य उज्जवल गर है बनाना

भविष्य उज्जवल गर है बनाना
तो छोड़ो परीक्षा से नाहक डरना
थोड़ा तनाव होता है अच्छा

न थोपें उन पर अपने सपनों का पहाड़

फिर से आ गया परीक्षाओं का मौसम
चलो बनाएं तनाव मुक्त “इकोसिस्टम”

मेरी सारी वांछित देह, लांछनों की…

मेरी सारी वांछित देह
लांछनों की
दहकती सलाखों से

 पोषित करें सद्भाव…

ये दुनिया नहीं है विश्राम स्थल
अभीष्ट कर्मों का ये कर्म स्थल
अद्वितीय इसका हर एक कण
इनके सदुपयोग का लें हम प्रण

बसंती बयार…

कल तक सूने खड़े वृक्ष की,
नव पल्लव ने झोली भर दी।