बैंकों के निजीकरण को लेकर फिर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में सरकार, जल्द होगा पैनल का गठन

नई दिल्ली 

केंद्र सरकार एकबार फिर सरकारी बैंकों का निजीकरण करने को लेकर बड़ा फैसला कर सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट में सरकारी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार इस बारे में सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। इसके लिए जल्दी ही एक पैनल का गठन किया जाएगा।

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आपको बता दें कि नीति आयोग ने अप्रैल 2021 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India)  और इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas Bank)के प्राइवेटाइजेशन की सिफारिश डिसइनवेस्टमेंट डिपार्टमेंट को की थी। लेकिन, इस बारे में अंतिम फैसला नहीं हो सका था। लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर सरकार जल्द ही कोई बड़ा फैसला कर सकती है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी बैंकों के निजीकरण के लिए एक पैनल का गठन किया जाएगा। ये पैनल उन बैंकों का नाम तय करेगा जिन्हें प्राइवेटाइज किया जाएगा।

मीडिया में आई खबरों के अनुसार, “प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकों की पहचान करने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी में डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट (DIPAM), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नीति आयोग के आधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैंकों के परफॉर्मेंस और उनके लोन पोर्टफोलियो समेत कई अन्य पैरामीटर्स के आधार पर इस कमेटी को प्राइवेटाइजेशन के नाम तय करने होंगे। इसमें छोटे और मझोले बैंकों के नाम शामिल हैं।”

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एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि बैंकों का निजीकरण एजेंडे में सबसे ऊपर है। पिछले कुछ महीनों में बैंकों की सेहत में सुधार आया है। इससे करीब सभी सरकारी बैंक प्रॉफिट में आ गए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक साल में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 65.4 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। जबकि, इस दौरान निफ्टी 50 में केवल 16 फीसदी की ही बढ़त रही।

निजीकरण के प्रोसेस में देश के 12 छोटे सरकारी बैंकों पर फोकस होगा। इनमें से बैंक Bank of Maharashtra और Uco Bank जैसे बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का फैसला भी लिया जा सकता है। इसके पहले 2021 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनिवेश कार्यक्रम के तहत दो सरकारी बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था।

सरकार ने बैंकिंग कानून (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित कराने के लिए लिस्ट किया था। हालांकि, अभी तक इसे संसद में सरकार की ओर से पेश नहीं किया गया है। इस बिल के तहत सरकार 1970 और 1980 के बैंकिंग कंपनी एक्ट में संशोधन करना चाहती है। इसमें सरकारी बैंकों के अधिग्रहण और ट्रांसफर से जुड़े नियम है।

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