शिक्षा विभाग में बड़ा भूचाल: हाईकोर्ट के फैसले से बदल जाएगा 5 साल की प्रिंसिपल पदोन्नतियों का खेल, डीईओ प्रमोशन पर भी गिरेगी गाज

राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में 1 अप्रैल 2021 से अब तक हुई सभी प्रिंसिपल पदोन्नतियों की रिव्यू डीपीसी (समीक्षा) करने के आदेश दिए हैं। व्याख्याता और हेडमास्टर विवाद पर आए इस फैसले से डीईओ स्तर तक के प्रमोशन प्रभावित होंगे। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

बीकानेर। राजस्थान के शिक्षा विभाग में पिछले 5 सालों से चल रहे सबसे बड़े पदोन्नति विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद साल 2021 से लेकर अब तक हुई सभी प्रिंसिपल पदोन्नतियों (DPC) का आधार ही बदल जाएगा। अदालत ने साफ कहा है कि विभाग 1 अप्रैल 2021 की स्थिति के अनुसार वरिष्ठता सूची की दोबारा समीक्षा (Review DPC) करे। इसका सीधा असर न सिर्फ प्रिंसिपलों पर, बल्कि भविष्य में होने वाले जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और उपनिदेशक (DD) स्तर के प्रमोशनों पर भी पड़ेगा।

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क्या था पूरा विवाद, क्यों पलटा फैसला?

दरअसल, यह पूरा मामला व्याख्याताओं (Lecturers) और हेडमास्टर्स (Headmasters) के बीच की खींचतान से जुड़ा है:

  • 2021-22 का नियम संशोधन: राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव कर दोनों की एक संयुक्त वरिष्ठता सूची बनाई थी।

  • विवाद की वजह: इसमें प्रशासनिक अनुभव (वेटेज) को ज्यादा तवज्जो दी गई, जिससे कई जूनियर हेडमास्टर्स, सीनियर व्याख्याताओं से ऊपर (सीनियर) हो गए।

  • अदालत का रुख: इस ‘अन्याय’ के खिलाफ व्याख्याता हाईकोर्ट पहुंचे। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नियमों का पालन और वास्तविक वरिष्ठता ही सर्वोपरि है। अगर सूची बनाने में कोई गलती हुई है, तो उसे तुरंत सुधारा जाए और पात्र कर्मचारियों को उनका कानूनी अधिकार मिले।

5 साल के प्रमोशन रडार पर: कौन-कौन से साल होंगे प्रभावित?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग को एक डोमिनो इफेक्ट (लगातार असर) का सामना करना पड़ेगा। समीक्षा का दायरा इस प्रकार रहेगा:

  1. शुरुआती समीक्षा: सबसे पहले सत्र 2021-22 और 2022-23 की प्रिंसिपल डीपीसी को दोबारा खंगाला जाएगा।

  2. आगे का असर: चूंकि बाद के प्रमोशन इसी सूची पर टिके थे, इसलिए सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की डीपीसी भी दोबारा रिव्यू होगी।

किसे मिलेगी ‘खुशखबरी’ और किसका बढ़ेगा ‘तनाव’?

  • व्याख्याताओं को बड़ी राहत: जो सीनियर व्याख्याता संशोधित नियमों के फेर में फंसकर पीछे छूट गए थे, उन्हें अब अपनी सही सीनियरिटी के हिसाब से प्रिंसिपल पद का हक मिल सकेगा।

  • हेडमास्टर्स की रैंकिंग बदलेगी: प्रशासनिक वेटेज के दम पर आगे निकले हेडमास्टर्स की रैंकिंग अब नीचे खिसक सकती है, जिससे उनके आगे के प्रमोशन अटक सकते हैं।

क्या मौजूदा प्रिंसिपलों की कुर्सी को खतरा है? जानकारों के मुताबिक, इस फैसले से वर्तमान में काम कर रहे प्रिंसिपलों की नौकरी या सैलरी पर तुरंत कोई आंच नहीं आएगी। सरकार आमतौर पर ऐसे मामलों में ‘शैडो पोस्ट’ (Shadow Post) या विशेष प्रशासनिक रास्ते निकालकर मौजूदा अफसरों के हितों की रक्षा करती है। हालांकि, डीईओ और जॉइंट डायरेक्टर बनने की उनकी कतार (सीनियरिटी नंबर) जरूर बदल जाएगी।

विभाग के सामने ‘हिमालय’ जैसी प्रशासनिक चुनौती

हाईकोर्ट का यह आदेश सालों पुराने विवाद को सुलझाने वाला तो है, लेकिन शिक्षा विभाग के लिए यह किसी बड़ी आफत से कम नहीं है। अब विभाग को हजारों कार्मिकों का रिकॉर्ड दोबारा खंगालना होगा, नई रिव्यू डीपीसी करनी होगी और पात्रता तय करनी होगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद और निदेशालय के लिए यह आने वाले दिनों में सबसे सिरदर्दी भरा काम साबित होने वाला है।

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