कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोना आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है। जानिए इससे होने वाले नुकसान, संक्रमण से बचने के तरीके, सही लेंस चुनने की सलाह और एक्सपायर्ड लेंस से जुड़े जरूरी सावधानियां।
हेल्थ डेस्क। रात को थकान में कॉन्टैक्ट लेंस उतारना भूल गए? अगर आपका जवाब ‘कभी-कभी ऐसा हो जाता है’ है, तो यह खबर आपके लिए है। क्योंकि यह छोटी-सी लापरवाही सिर्फ आंखों में जलन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई मामलों में कॉर्निया को इतना नुकसान पहुंचा सकती है कि रोशनी तक प्रभावित हो जाए।
दरअसल, हमारी आंख का सबसे बाहरी पारदर्शी हिस्सा कॉर्निया बिना किसी रक्तवाहिनी के काम करता है। उसे ऑक्सीजन सीधे हवा और आंसुओं से मिलती है। लेकिन जैसे ही कॉन्टैक्ट लेंस लंबे समय तक आंखों पर रहते हैं, खासकर नींद के दौरान, ऑक्सीजन की सप्लाई काफी कम हो जाती है। यही वह मौका होता है, जब बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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सुबह उठते ही लेंस खींचकर निकालना पड़ सकता है भारी
अगर गलती से लेंस पहनकर सो गए हैं तो जागते ही उन्हें जबरदस्ती निकालने की भूल बिल्कुल न करें। नींद के दौरान लेंस सूखकर कॉर्निया से चिपक सकते हैं। ऐसे में उन्हें खींचने से आंख की सतह पर खरोंच आ सकती है।
सही तरीका यह है कि पहले आर्टिफिशियल टियर्स या डॉक्टर की सलाह वाली लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स डालें। कुछ मिनट इंतजार करें और जब लेंस नरम हो जाए, तभी उसे धीरे-धीरे निकालें। अगर आंख लाल हो, तेज दर्द हो या धुंधला दिखने लगे तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। यह कॉर्निया में संक्रमण का संकेत हो सकता है और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।
पुराना या एक्सपायर्ड लेंस पहनना भी बड़ा जोखिम
सिर्फ लेंस पहनकर सोना ही नहीं, एक्सपायरी निकल चुके लेंस का इस्तेमाल भी आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। समय के साथ लेंस को सुरक्षित रखने वाला सॉल्यूशन अपनी क्षमता खो देता है। इसके बाद बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं, जो आंखों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
इतना ही नहीं, पुराने लेंस सख्त हो जाते हैं और आंखों पर ठीक से फिट नहीं बैठते। इससे कॉर्निया पर खरोंच, जलन, पानी आना और लगातार असहजता जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
हर लेंस हर किसी के लिए सही नहीं होता
बाजार में मिलने वाले डेली, 15 दिन वाले और मंथली लेंस देखने में भले एक जैसे लगें, लेकिन तीनों का इस्तेमाल और देखभाल अलग-अलग है। डेली डिस्पोजेबल लेंस संक्रमण के लिहाज से सबसे सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। वहीं 15 दिन और महीने भर चलने वाले लेंस की रोजाना सफाई और सही तरीके से स्टोरेज बेहद जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह के बिना लेंस खरीदना भी ठीक नहीं
सिर्फ चश्मे का नंबर देखकर कॉन्टैक्ट लेंस खरीद लेना सही तरीका नहीं है। कॉर्निया का आकार, आंखों में बनने वाले आंसुओं की मात्रा और ऑक्सीजन ट्रांसमिशन जैसी कई बातें तय करती हैं कि कौन-सा लेंस आपकी आंखों के लिए सुरक्षित रहेगा। इसलिए लेंस खरीदने से पहले नेत्र विशेषज्ञ या ऑप्टोमेट्रिस्ट से जांच जरूर कराएं।
याद रखिए… कॉन्टैक्ट लेंस आपकी आंखों की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं, लेकिन उनकी सही देखभाल न की जाए तो यही लेंस आपकी आंखों के सबसे बड़े दुश्मन भी बन सकते हैं।
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