‘होठों पर मुस्कान’ डॉ. अलका अग्रवाल की एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो यादों, दर्द, आत्मसंयम और जीवन में मुस्कुराते रहने का प्रेरक संदेश देती है।
जब अतीत की पुस्तक को,
खोला यादों की पुरवइया ने।
आंखों से गंगा- जमुना की,
धारा जैसे उमड़ पड़ी हो।
कोई ना देखे मेरे अश्रु,
मेरे मन की व्यथा ना जाने।
रोक दिया यह कह कर उनको,
रुक जा, ओ निर्झर अनजाने।
अपने मन की पीर छुपा ले,
दर्द किसी को नहीं दिखाने।
होठों पर मुस्कान लिए बस,
सब के सम्मुख हंस ले, गा ले।
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