हीरे सी चमकती किस्मत है मेरी…

एक नहीं वरन् दो माँ हैं मेरी
हीरे सी चमकती किस्मत है मेरी

मंद-मंद क्यों मुस्काते हो…

मंद-मंद क्यों मुस्काते हो
हंसने में क्यों शर्माते हो,
खुल के हंस लो आज प्यारे

जीवन और प्रेम…

प्रेम नीर से ही बढ़ता है,
जीवन का यह पौधा।
जीवन के अपने अनुभव से

खेल तो आखिर यही चलता है…

गरमी
जब
करने लगती है
भारी जुल्म

ओ! मलिन जमुना जल…

बहौ
ओ! मलिन जल
जमुना बहौ
जे तन वृंदावन अरु

यादें…

यादें बहुत खुबसूरत होती हैं
न लड़ती हैं न झगड़ती हैं

कैसे भुलाएं?

यथार्थ को छैनी से
स्वप्नों को काटा छाँटा

जीवन और प्रेम

प्रेम जीवन के दीपक का तेल है।
प्रेम एक मन से दूजे का मेल है।

इंसान तो जैसे मायावी हो गया

कैसे पहचानें किसी को,
एक चेहरे पर
ढेरों चेहरे चढ़ा कर

मनोभावों की अभिव्यक्ति है कविता

क्रोध, करूणा, दया, प्रेम, भक्ति, हास्य
सभी मनोभावों की अभिव्यक्ति है कविता ।
कार्य प्रवृत्ति हेतु प्रेरित कर