जब प्यारा बचपन बीता था,
तब खुश थे अब तो बड़े हुए,
मन की करने का जज्बा था,
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मुलाकात…
बचपन से मुलाकात कर लेते हैं,
दोस्तों से कही अनकही बात कर लेते हैं।
उसके डब्बे से मैंने भी रोटी चुराकर खाई थी,
ये बात उसको मैंने उसको कभी
कटे वृक्ष सिमटते पर्वत…
कटे वृक्ष सिमटते पर्वत, पीड़ा देने वाले हैं
एक दिन जब सब मिट जांयेंगे, पड़ें जान के लाले है।
