बचपन से मुलाकात कर लेते हैं,
दोस्तों से कही अनकही बात कर लेते हैं।
उसके डब्बे से मैंने भी रोटी चुराकर खाई थी,
ये बात उसको मैंने उसको कभी
Tag: poem
मुलाकात…
कटे वृक्ष सिमटते पर्वत…
कटे वृक्ष सिमटते पर्वत, पीड़ा देने वाले हैं
एक दिन जब सब मिट जांयेंगे, पड़ें जान के लाले है।
