चार प्रेरणादायक मुक्तक जो जिंदगी के संघर्ष, सच्चाई और हौसले को बेहद सरल और गहरे शब्दों में बयां करते हैं। पढ़ें दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता।
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मंदिर में छोटी सी प्रार्थना, और भर आई दादाजी की आंखें | पांच साल की अनाया बोली – ‘भगवान जी, पापा को अब घर भेज दो’
पांच साल की अनाया मंदिर में भगवान से ऐसी प्रार्थना करती है जिसे सुनकर दादाजी की आंखें भर आती हैं। मासूम बच्ची का अपने पिता के लिए प्यार और इंतजार दिल को छू लेने वाली कहानी बन जाता है।
डरी हुई नन्ही…
एक मासूम बच्ची, आया की डरावनी कहानियों से इतना सहम गई कि अंधेरे में उसे चुड़ैल दिखाई देने लगी। पढ़ें “डरी हुई नन्ही” — बचपन के डर और माता-पिता के स्नेह को दर्शाती एक भावनात्मक लघु कथा।
सुख…
पानी के बुलबुले की भांति क्षणिक,
कांच की भांति भंगुर,
स्वयं की परछाई की भांति
हाथ ना आने वाला
होता है सुख।
अतीत की भूल…
यह तो कोई बात नहीं है ,
एक भूल यदि कोई हो गई
उसको लेकर के ही सोचें
कैसे ,क्यों कर हुआ ये हमसे।
गाजर का हलवा…
रामवती सुबह 7:00 बजे जब अपने घर से काम करने के लिए निकली, तब कुछ दूरी पर भी कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था । सर्दी से वह कांप रही थी ,उसने अपने शॉल को और कस कर
मेरी गलती क्या है…
आजकल मेरा पोता जो चेन्नई में पढ़ रहा है, छुट्टियों में घर आया हुआ है, लेकिन अक्सर वह दोस्तों के यहां चला जाता है। जब घर में रहता है तो हमेशा मोबाइल में ही आंखें गड़ाए रहता है। आज जब दोपहर में
‘सब के लिए खिलौने’
डॉ. अलका अग्रवाल (Dr. Alka Agarwal) की पुस्तक ‘सब के लिए खिलौने’ एक महत्वपूर्ण बाल नाटक संकलन है ,जो आधुनिक बच्चों की शैक्षणिक और नैतिक आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसके सभी नाटकों के प्रमुख पात्र
रौनक…
सुबह उठी तो कुछ शोर सा सुनाई दिया । मेरे सामने के मकान में कॉलेज के सेवनिवृत्त प्राचार्य रहते हैं, उनके यहां चोरी हो गई थी। पड़ोस वाली आंटी से बात करने पर पता चला कि चोर खिड़की तोड़कर अंदर घुसे थे।…. शायद उन्हें कुछ
