होठों पर मुस्कान’ डॉ. अलका अग्रवाल की एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो यादों, दर्द, आत्मसंयम और जीवन में मुस्कुराते रहने का प्रेरक संदेश देती है।
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कागज़ पर ही सही…
यह कविता समाज में न्याय और अन्याय के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाती है। जब निर्दोष को छोटी भूल पर कठोर दंड और प्रभावशाली व्यक्ति को बड़ी गलती पर भी छूट मिलती है, तब एक संवेदनशील मन अपने शब्दों के माध्यम से मौन प्रतिरोध दर्ज करता है।
निर्मोही कौन?
पति की मृत्यु के बाद शोक में डूबी विभा को सांत्वना देने के बजाय एक कटाक्ष उसकी पीड़ा को और गहरा कर देता है। यह मार्मिक लघुकथा बताती है कि दुख की घड़ी में शब्द भी मरहम बन सकते हैं और घाव भी। अंत में कहानी पाठक से एक सवाल पूछती है—आखिर निर्मोही कौन है?
चार मुक्तकों में जिंदगी का आईना
चार प्रेरणादायक मुक्तक जो जिंदगी के संघर्ष, सच्चाई और हौसले को बेहद सरल और गहरे शब्दों में बयां करते हैं। पढ़ें दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता।
चार मुक्तकों में जिंदगी का आईना
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मंदिर में छोटी सी प्रार्थना, और भर आई दादाजी की आंखें | पांच साल की अनाया बोली – ‘भगवान जी, पापा को अब घर भेज दो’
पांच साल की अनाया मंदिर में भगवान से ऐसी प्रार्थना करती है जिसे सुनकर दादाजी की आंखें भर आती हैं। मासूम बच्ची का अपने पिता के लिए प्यार और इंतजार दिल को छू लेने वाली कहानी बन जाता है।
डरी हुई नन्ही…
एक मासूम बच्ची, आया की डरावनी कहानियों से इतना सहम गई कि अंधेरे में उसे चुड़ैल दिखाई देने लगी। पढ़ें “डरी हुई नन्ही” — बचपन के डर और माता-पिता के स्नेह को दर्शाती एक भावनात्मक लघु कथा।
सुख…
पानी के बुलबुले की भांति क्षणिक,
कांच की भांति भंगुर,
स्वयं की परछाई की भांति
हाथ ना आने वाला
होता है सुख।
अतीत की भूल…
यह तो कोई बात नहीं है ,
एक भूल यदि कोई हो गई
उसको लेकर के ही सोचें
कैसे ,क्यों कर हुआ ये हमसे।
