यह कविता समाज में न्याय और अन्याय के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाती है। जब निर्दोष को छोटी भूल पर कठोर दंड और प्रभावशाली व्यक्ति को बड़ी गलती पर भी छूट मिलती है, तब एक संवेदनशील मन अपने शब्दों के माध्यम से मौन प्रतिरोध दर्ज करता है।
यह कविता समाज में न्याय और अन्याय के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाती है। जब निर्दोष को छोटी भूल पर कठोर दंड और प्रभावशाली व्यक्ति को बड़ी गलती पर भी छूट मिलती है, तब एक संवेदनशील मन अपने शब्दों के माध्यम से मौन प्रतिरोध दर्ज करता है।