हाय री दौलत हाय री दौलत,
दौलत दौलत चिल्लाते हो।
साथ न लेकर गया सिकंदर,
फिर काहे तुम भरमाते हो।
दौलत की गठरी को खोलो,
बाँट के दौलत खुशी मिलेगी।
कर लो सेवा पीड़ित जन की,
इससे तुमको खुशी मिलेगी।।
चलो, आज कुछ अच्छा करते हैं-3
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