होठों पर मुस्कान …

‘होठों पर मुस्कान’ डॉ. अलका अग्रवाल की एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो यादों, दर्द, आत्मसंयम और जीवन में मुस्कुराते रहने का प्रेरक संदेश देती है।

डा . अलका अग्रवाल , सेवानिवृत कॉलेज प्राचार्य

जब अतीत की पुस्तक को,
खोला यादों की पुरवइया ने।
आंखों से गंगा- जमुना की,
धारा जैसे उमड़ पड़ी हो।

कोई ना देखे मेरे अश्रु,
मेरे मन की व्यथा ना जाने।
रोक दिया यह कह कर उनको,
रुक जा, ओ निर्झर अनजाने।

अपने मन की पीर छुपा ले,
दर्द किसी को नहीं दिखाने।
होठों पर मुस्कान लिए बस,
सब के सम्मुख हंस ले, गा ले।

————————

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

EPFO का बड़ा बदलाव: अब PF से जुड़े काम होंगे आसान, देशभर में एक सिस्टम से मिलेगी सुविधा

लेंस पहनकर सो गए? सुबह उठते ही हो सकती है जिंदगी की सबसे बड़ी गलती | डॉक्टर बोले- 5 मिनट की जल्दबाजी आंखों की रोशनी तक छीन सकती है

क्या हाई BP बदल सकता है आपका स्वभाव? | नई स्टडी का दावा- दिल ही नहीं, दिमाग और पर्सनैलिटी पर भी पड़ सकता है असर

मुसीबत में हैं तो याद रखें सिर्फ 5 अंक… 14490 | महिलाओं के लिए 24 घंटे खुली रहेगी मदद की लाइन, शिकायत से काउंसलिंग तक मिलेगी सहायता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *