लखनऊ
उत्तर प्रदेश (UP) के राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) पर एक नए कानून का मसौदा तैयार कर लिया है। इस पर अब जनता की राय मांगी गई है। यदि यह मसौदा कानून का रूप ले लेता है तो इसके लागू होने के बाद दो से ज्यादा बच्चे वाले किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी और साथ ही उसे सब्सिडी या किसी सरकारी कल्याण योजना का लाभ लेने से रोक दिया जाएगा। इतना ही नहीं वो सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता या किसी स्थानीय निकाय का चुनाव भी नहीं लड़ सकता है।
इसके अलावा सरकारी नौकरी में प्रमोशन नहीं मिल सकता है, उसका राशन कार्ड चार सदस्यों तक सीमित होगा और उसे किसी भी तरह की सरकारी सब्सिडी नहीं मिलेगी। इसमें 77 सरकारी योजनाओं व अनुदान से भी वंचित रखने का प्रावधान है। अगर वह तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने व चुनाव ना लड़ने देने का प्रस्ताव होगा। सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन तथा बर्खास्त करने तक की सिफारिश है। ये एक ऐसा कानून है, जो उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। साथ ही नई बहस भी छिड़ सकती है।
दो बच्चों की नीति को बढ़ावा देने वालों को इंसेंटिव
इसके साथ ही दो बच्चों की नीति को बढ़ावा देने वालों को इंसेंटिव भी दिया जाएगा।अगर परिवार के अभिभावक सरकारी नौकरी में है और नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट, पीएफ में एंपलॉयर कंट्रीब्यूशन बढ़ाने जैसी कई सुविधाएं देने की सिफारिश की गई है।
इन्हें मिलेगा मुफ्त हेल्थ केयर सर्विस और बीमा कवरेज और ये मिलेंगी सुविधाएं
इसके अलावा, जिनके पास केवल एक बच्चा है और वे अपनी इच्छा से नसबंदी कराते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त रूप से मुफ्त हेल्थ केयर सर्विस और बीमा कवरेज मिलेगा, जब तक कि बच्चे की उम्र 20 साल नहीं हो जाती है। साथ ही IIM और AIIMS सहित सभी शिक्षण संस्थानों में एडमिशन में सिंग्ल चाइल्स को वरीयता, ग्रेजुएशन स्तर तक मुफ्त शिक्षा, लड़की के मामले में हायर स्टडी के लिए छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरियों में एक बच्चा होने पर वरीयता दी जाएगी।
दो बच्चे हैं तो दो और एक है तो चार अतिरिक्त वेतन वृद्धि
इस मसौदे के अनुसार दो बच्चे के मानदंड का पालन करने वाले सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त रूप से पूरी सेवा के दौरान दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि, पूरे वेतन और भत्ते के साथ 12 महीने का मातृत्व या पितृत्व अवकाश (Maternity or Paternity leave) मिलेगा। एक बच्चे के मानदंड को अपनाने वाले कर्मचारी आम जनता को ऐसा करने के लिए दिए गए प्रोत्साहन के अलावा सभी में चार अतिरिक्त वेतन वृद्धि (Salary Hike) के पात्र होंगे।
वचन भंग किया तो जाएगी नौकरी
अगर यह लागू हुआ तो एक साल के भीतर सभी सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों स्थानीय निकाय में चुने जनप्रतिनिधियों को शपथ पत्र देना होगा कि वह इसका उल्लंघन नहीं करेंगे। मसौदे में कहा गया है कि राज्य सरकार के तहत प्रत्येक सरकारी कर्मचारी, जिसके दो से ज्यादा बच्चे हैं, उसे इस अधिनियम के लागू होने के समय इस आशय का वचन देना होगा कि वे दो-बच्चे के मानदंड का उल्लंघन नहीं करेंगे।
प्रस्तावित कानून कहता है, ‘अगर राज्य सरकार के अधीन किसी सरकारी कर्मचारी को उसके द्वारा दिए गए वचन का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से उसकी नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा और भविष्य में राज्य सरकार की किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने से वंचित कर दिया जाएगा।’
साथ ही, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले दंपती, जिनके केवल एक बच्चा है और जो खुद या पति और पत्नी में से कोई एक नसबंदी ऑपरेशन से गुजरते हैं, सरकार से एकमुश्त 80,000 रुपए की राशि के भुगतान के लिए पात्र होंगे, अगर उनके पास एक लड़का है, और अगर वो एक बच्चा लड़की है, तो 1 लाख रुपए मिलेंगे।
दो बच्चे हैं और नौकरी नहीं है तो ये मिलेंगे फायदे
दो बच्चों वाले दंपती अगर सरकारी नौकरी में नहीं हैं तो उन्हें पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट व अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। वहीं एक संतान पर खुद से नसबंदी कराने वाले अभिभावकों को संतान के 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की सिफारिश है।
ड्राफ्ट सरकारी वेबसाइट पर अपलोड
विधि आयोग ने इसका ड्राफ्ट सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया है और 19 जुलाई तक जनता से राय मांगी गई है। यह ड्राफ्ट ऐसे समय में पेश किया गया है जब 11 जुलाई को योगी सरकार नई जनसंख्या नीति जारी करने जा रही है। आयोग के मुताबिक इस ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए कोई सरकारी आदेश नहीं है। खुद की प्रेरणा से यह ड्राफ्ट आयोग ने तैयार किया है।
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