भरतपुर जिला व्यापार महासंघ ने यूपीआई के कुछ व्यापारी लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क का विरोध किया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन भेजकर इसे वापस लेने की मांग की।
भरतपुर। यूपीआई से होने वाले कुछ व्यापारी लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था को लेकर भरतपुर के व्यापारिक संगठनों ने विरोध जताया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल एवं भरतपुर जिला व्यापार महासंघ की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को ई-मेल के जरिए ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की गई है।
ज्ञापन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री एवं भरतपुर जिला व्यापार महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र गोयल की ओर से भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि यूपीआई देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है और छोटे-बड़े सभी तरह के व्यापारी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
सब्जी वाले से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक पहुंचा यूपीआई
व्यापार मंडल ने अपने ज्ञापन में कहा कि यूपीआई को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों के बाद व्यापारियों ने इसे अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों पर अपनाया। आज बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ सब्जी विक्रेता, फल विक्रेता, पान की दुकान, चाय की दुकान और छोटे दुकानदार भी यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। ज्ञापन के मुताबिक आम उपभोक्ताओं ने भी डिजिटल भुगतान को रोजमर्रा की सहज भुगतान व्यवस्था के तौर पर अपना लिया है और इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
‘एक भी व्यापारी या ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ नहीं’
व्यापार मंडल ने प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर को लेकर कहा है कि 96 प्रतिशत या 4 प्रतिशत से जुड़े किसी भी तर्क से व्यापारियों की चिंता दूर नहीं होती। संगठन की स्पष्ट मांग है कि किसी भी व्यापारी या उपभोक्ता पर अतिरिक्त शुल्क अथवा नई लागत का बोझ नहीं आना चाहिए।
ज्ञापन में आशंका जताई गई है कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू होने से व्यापारी और ग्राहक के बीच भुगतान को लेकर भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। संगठन का कहना है कि यूपीआई का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे समय में शुल्क की व्यवस्था इसके सहज इस्तेमाल में व्यवधान पैदा कर सकती है।
वित्त मंत्री से तत्काल फैसला लेने की मांग
नरेंद्र गोयल ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के सरकारी उद्देश्य के अनुरूप यूपीआई को सरल, सुविधाजनक और शुल्क-मुक्त रखना जरूरी है।
व्यापार मंडल ने केंद्र सरकार से करोड़ों व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इस मामले में सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद जताई है। साथ ही कहा है कि इससे डिजिटल भारत की भावना को मजबूती मिलेगी।
फैसला नहीं बदला तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में व्यापार मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो व्यापारी वर्ग अपने अधिकारों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। संगठन ने कहा है कि व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा। अब व्यापार मंडल की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर है।
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