परिश्रम
डॉ. विनीता राठौड़
जाने भी दो यारोनाहक डर -डर कर यूं क्यूं जीना हरि इच्छा के बिना है असंभवइस दुनिया में जीना और मरनातो हो कर निडर जीवन है जीना
जाने भी दो यारोसदा पूर्णतावादी होना खास फर्क नहीं इससे पड़तागर काम हो थोड़ा बिखरा-बिखरा है जरूरी अथक परिश्रम जारी रखना।
जाने भी दो यारोप्रयास सभी को खुश करने का है असंभव सभी को राजी रखना कोशिश बस इतनी सी जारी रखनाकि दिल किसी का कभी दुखे ना।
जाने भी दो यारोथोथे रिश्तों को जबरन ढोना व्यर्थ है खुदगर्जों का साथ निभानाहै सुखद अपने ही हाल में मस्त मलंग हो जीवन जीना।
जाने भी दो यारोविगत गलतियों का रोना यूं रोना भूल मानव से हो सकती है दोहराव नहीं हो उनका फिर से बस इतना सा प्रयास है करना।
जाने भी दो यारोखुद का खुद पर अविश्वास यूं करना दूजों का विश्वास यदि हासिल है करना तो स्वयं पर भरोसा तुम्हे होगा जतानाआत्मविश्वास को बनाए रखना।
जाने भी दो यारोव्यर्थ बातों पर चिंता करनाजिन पर नियंत्रण नहीं है अपनासर्वत्र विराजमान जग नियन्ताडोर उसी की थामे रखना।
(लेखिका राजकीय महाविद्यालय, नाथद्वारा, राजसमन्द में प्राणीशास्त्र की सह आचार्य हैं)——————
आज की लक्ष्मीबाई…
अपनी कब चली, पता ही नहीं चला…
21 विश्वविद्यालय फर्जी घोषित, UGC ने जारी की सूची, जानें आपके शहर में कौन सी है?
सितम्बर में इस तिथि से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि, जानें इस बार किस पर सवार होकर आएंगी मां
‘फिल्मफेयर’ ने कंगना रनौत को भेजा अवॉर्ड नॉमिनेशन का खत, एक्ट्रेस बोली- नहीं चाहिए करप्ट प्रैक्टिस को प्रोत्साहित करने वाला ऐसा अवॉर्ड | जानिए फिर इसके बाद क्या हुआ
केंद्र के अब सभी विभागों में मिलेगा यह अलाउंस, पूरी करनी होगी यह शर्त
Indian Railways News: रेलवे अब खत्म करेगा पति-पत्नी की दूरियां, जारी किए ये आदेश
7th Pay Commission: कर्मचारियों को DA बढ़ने का बेसब्री से इंतजार, सरकार का क्या है विचार; जानिए यहां
मैटरनिटी लीव को लेकर नया आदेश, अब इन स्थितियों में भी मिल सकती है 60 दिन की छुट्टी, यहां जानिए डिटेल