‘उठो-जागो और लक्ष्य तक मत रुको’ की गूंज | राष्ट्रीय युवा दिवस पर उदयपुर कृषि महाविद्यालय में विवेकानंद के विचारों से युवा चेतना जागृत

राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 पर उदयपुर कृषि महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद के विचारों से ओतप्रोत कार्यक्रम, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत का युवाओं को प्रेरक संदेश।

उदयपुर 

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर में राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विचार, ऊर्जा और आत्मबोध का उत्सव बनकर सामने आया। स्वामी विवेकानंद के विचारों को केंद्र में रखते हुए पूरे दिन युवाओं के लिए प्रेरणा, संवाद और चिंतन का माहौल रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए स्वामी विवेकानंद के अमर संदेश—
“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको”—को जीवन का मूल मंत्र बताया।
उन्होंने कहा कि “हर युवा के भीतर यह भाव होना चाहिए कि मैं ही भारत हूँ। अगर यह सोच दिल में उतर जाए, तो राष्ट्र निर्माण अपने आप शुरू हो जाता है।”

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डॉ. रावत ने कृषि विद्यार्थियों से स्वदेशी सोच अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में युवा सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को ‘अमृतकाल की अमृत पीढ़ी’ बताए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि अब यह जिम्मेदारी युवाओं पर है कि वे अपने आचरण और कर्म से इस विश्वास को साकार करें।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए एक सशक्त संदेश दिया—
“सकारात्मक लोगों का मौन समाज के लिए सबसे खतरनाक होता है, इसलिए युवाओं को हर मंच पर अपनी जागरूक भूमिका निभानी चाहिए।”

रैली से शुरू हुआ विचारों का सफर

कार्यक्रम से पहले महाविद्यालय परिसर से विद्यार्थियों की एक प्रेरक रैली निकाली गई, जो सूरजपोल चौराहे से होते हुए नूतन सभागार पहुंची। यहीं से औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार महला ने मुख्य अतिथि डॉ. मन्नालाल रावत और विशिष्ट अतिथि श्री सुंदरलाल कटारिया (प्रांत सह मंत्री, विश्व हिंदू परिषद) का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. महला ने सांसद महोदय से मेवाड़ के जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को आगामी केंद्रीय बजट में शामिल कराने का आग्रह भी रखा।

“शिकागो से उठी आवाज, जो आज भी दिशा देती है”

विशिष्ट अतिथि श्री सुंदरलाल कटारिया ने स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों को जीवंत शैली में प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में केवल एक संबोधन—
“अमेरिका के मेरे भाइयों और बहनों”—ने कैसे पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच लिया।
उन्होंने स्वामीजी के रामकृष्ण परमहंस के सान्निध्य, मां काली से साक्षात्कार, और खेतड़ी के महाराजा अजित सिंह के साथ हुए आध्यात्मिक संवादों का उल्लेख करते हुए “दरिद्र नारायण भवः” के संदेश को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।

550 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता

महाविद्यालय के सहायक अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) डॉ. एस.एस. लखावत ने बताया कि इस अवसर पर “स्वामी विवेकानंद के दर्शन एवं विचारों द्वारा देश के युवा व्यक्तित्व निर्माण पर प्रभाव” विषय पर व्याख्यान माला आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के सभी संघटक महाविद्यालयों के लगभग 550 विद्यार्थी, अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और कर्मचारी शामिल हुए।

कार्यक्रम में खाद्य एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. लोकेश गुप्ता, विश्वविद्यालय नोडल अधिकारी डॉ. विनोद यादव, डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा, डॉ. कपिल देव आमेटा, डॉ. जगदीश चौधरी, डॉ. जी.एल. मीना, डॉ. अमित दाधिच, डॉ. हरिसिंह मीणा, डॉ. धर्मपाल सिंह डूंडी, डॉ. रामनारायण कुम्हार, डॉ. सी.पी. नामा सहित बड़ी संख्या में संकाय सदस्य मौजूद रहे।

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