भरतपुर में हरित बृज सोसायटी ने भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए परिंडे लगाकर पानी की व्यवस्था की, साथ ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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भरतपुर
जब गर्मी आसमान से आग बरसा रही है, तब भरतपुर में कुछ हाथ ऐसे भी हैं जो बेजुबान पक्षियों के लिए ‘जीवन की बूंदें’ जुटा रहे हैं। हरित बृज सोसायटी ने भीषण गर्मी को देखते हुए शहर के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों के लिए परिंडे लगाकर पानी की व्यवस्था शुरू की—एक ऐसा काम, जो इंसानियत की असली तस्वीर दिखाता है।
इस पुनीत अभियान की शुरुआत श्री बांके बिहारी जी मन्दिर, किला भरतपुर से सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. संगीता चतुर्वेदी के नेतृत्व में की गई। मंदिर परिसर से शुरू हुआ यह कारवां अब शहर के कई हिस्सों में पक्षियों के लिए राहत बन रहा है।
हर साल की परंपरा, हर बार नई उम्मीद
वरिष्ठ उपाध्यक्ष विष्णु कुमार शर्मा ने बताया कि सोसायटी हर साल गर्मियों में यह अभियान चलाती है, ताकि भीषण ताप में पक्षियों को पानी मिल सके। इस बार भी परंपरा निभाते हुए शुरुआत आराध्यदेव बांके बिहारी जी मंदिर से ही की गई।
सिर्फ परिंडे नहीं, पूरा पर्यावरण मिशन
महासचिव सतेंद्र यादव ने बताया कि सोसायटी लगातार सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए न केवल परिंडे लगा रही है, बल्कि पानी की टंकियां, अनाज पात्र, चिड़ियों के घोंसले और पौधारोपण जैसे कार्यों से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती दे रही है।
मोक्षधाम में हरियाली और संवेदनाओं का संगम
इसके बाद सोसायटी के सदस्यों ने अनाह गेट मोक्षधाम परिसर में अपने-अपने घरों से लाए गए फूलों के पौधों का रोपण किया और पक्षियों के लिए परिंडे लगाए। संयोजक अशोक गुप्ता और सहसंयोजक जगदीश शर्मा ने मोक्षधाम के विकास कार्यों की जानकारी भी साझा की।
कॉलेज परिसर में भी दिखी जिम्मेदारी
अभियान की कड़ी में राजकीय विधि महाविद्यालय, भरतपुर में गौरव शर्मा के नेतृत्व में खाली परिंडों की सफाई कर उनमें पानी भरा गया—ताकि कोई भी प्यासा परिंदा बिना पानी के न लौटे।
इस मौके पर डॉ. सतीश लवानिया, डॉ. रमाकांत चतुर्वेदी, श्रीभगवान शर्मा, धीरेन्द्र सिंह, हिमांशु सारस्वत, दीपक शर्मा, अरुण जैन, तुलसीराम शर्मा, संदीप शर्मा, दिलीप गुप्ता, मदनमोहन और रवीन्द्र समेत कई सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
मानवता की मिसाल बना अभियान
हरित बृज सोसायटी का यह प्रयास सिर्फ पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी मिसाल है—जहां इंसान, प्रकृति और जीव-जंतुओं के बीच संतुलन बनाने की सच्ची कोशिश नजर आती है।
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