बाल गीत
डॉ. अंजीव अंजुम
रात अमावस में दीपों की,
शोभा अजब निराली।
त्यौहारों में सबसे प्यारा,
है त्यौहार दीवाली।
माटी के हर कण कण पर,
चमक दमक जा जाती।
खुशियां फुलझडियां सी बनकर,
हाथों में इठलाती।
ज्योति अल्पनाओं से जगमग,
होतीं रातें काली।
त्यौहारों में सबसे प्यारा,
है त्यौहार दीवाली।
मन के आंगन आज रंगोली,
सजा रहे हैं तारे।
आम अशोक पात के संग संग,
फूल महकते दरवाजे।
सूनी आंखों की राहों पर,
आज मिली उजियाली।
त्यौहारों में सबसे प्यारा,
है त्यौहार दीवाली।
रिश्तों के दीपक भी पल पल
पग पग दमक रहे हैं।
मन की अंधियारी नदियां में,
किंवदंती बने बहे हैं।
स्वर्णिम सभी दिशाएं सजकर
आज हुईं मतवाली।
त्यौहारों में सबसे प्यारा,
है त्यौहार दीवाली।
(लेखक प्रधानाध्यापक एवं राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी जयपुर की पत्रिका ब्रजशतदल के सहसंपादक हैं )
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