खुशी का राज़…

क्या आपके पास सब कुछ है लेकिन फिर भी मन शांत नहीं है? पढ़िए डॉ. अलका अग्रवाल की यह दिल को छू लेने वाली प्रेरणादायक कहानी ‘खुशी का राज़’ और जानिए कि असली सुकून और खुशी किस बात में छिपी है।

डा. अलका अग्रवाल, सेवानिवृत कॉलेज प्राचार्य, जयपुर

गुप्ता जी आज धन, पद, यश सब कुछ हासिल कर चुके हैं,….लेकिन, सब कुछ होते हुए भी उन्हें खुशी नहीं महसूस होती।
एक रविवार को उन्होंने ड्राइवर और कार को घर पर ही छोड़ा और दिन भर के लिए एक ऑटो रिक्शा किया। वे एक साधारण ढाबे में पहुंच गए । नाश्ता करने के बाद एक मरियल सा लड़का बर्तन लेने आया तो उन्होंने उसे 500 रुपए का नोट दिया।

लड़का सेठ से बचे रुपये लेकर आया तो गुप्ता जी उसका कंधा प्यार से थप थपाकर बोले। ‘तुम्हारे काम आएंगे, रख लो।’ बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इसके बाद वे ऑटो से अपने पुराने पड़ौसी अंकल के घर गए, अंकल की काफी उम्र हो गई थी और वे बीमार भी थे। वे उन्हें डाक्टर के यहां ले गए, उनके लिए दवाई और फल खरीदे।अंकल आंटी बहुत खुश हुए और उन्हें खूबआशीर्वाद दिया।

इसके बाद गुप्ता जी ने बाजार में ऑटो रोककर एक टोकरा भरकर तरह- तरह के फल पैक करा लिए। अंत में ऑटो ने उन्हें घर पर छोड़ा। ऑटो ड्राइवर फलों की टोकरी उतारने लगा तो उन्होंने मना कर दिया।
‘अरे ,यह तो तुम्हारे लिए है,’ उन्होंने बड़े प्यार से कहा। आज गुप्ता जी बहुत समय बाद स्वयं को इतना खुश और हल्का महसूस कर रहे थे। खुशी का राज़ उन्हें समझ में आ गया था।

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