राजस्थान चैंबर अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की सिफारिशों का स्वागत किया। रिफंड, ITC, कर विवादों और एमएसएमई को राहत देने वाले सुधारों पर जोर दिया।
जयपुर। जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रियागत सुधारों से व्यापारियों और उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद के बीच राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (RCCI) ने जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में की गई सिफारिशों का स्वागत किया है। चैंबर अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने कहा कि कर अनुपालन को सरल बनाने, रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने और कर विवादों में स्पष्टता लाने से कारोबारियों का समय और लागत बच सकती है।
बैठक की सिफारिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. जैन ने कहा कि कर व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व संग्रह के साथ व्यापार एवं उद्योग के लिए सरल, स्थिर और भरोसेमंद वातावरण तैयार करना भी होना चाहिए। रिफंड प्रक्रिया में सुधार, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े प्रावधानों में स्पष्टता, पंजीकरण प्रक्रियाओं का स्वचालन और कर विवादों के निपटारे के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
कर विवादों और नोटिस की प्रक्रिया में स्पष्टता पर जोर
डॉ. जैन ने कहा कि गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में निर्धारित समयसीमा के भीतर कर एवं ब्याज जमा कराने पर कम दंड का प्रावधान तथा नोटिस, आदेश और व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया को मानकीकृत करने से करदाताओं को अधिक निश्चितता मिल सकती है। इससे विभागीय कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ने और वास्तविक रूप से कर अनुपालन करने वाले कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत गिरफ्तारी और अभियोजन की सीमा से जुड़े प्रस्तावों का उद्देश्य कर प्रशासन में संतुलन बनाए रखना और कारोबारी समुदाय का विश्वास मजबूत करना होना चाहिए। इन बदलावों का वास्तविक प्रभाव संबंधित अधिसूचनाओं, नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगा।
रिफंड में तेजी से उद्योगों की कार्यशील पूंजी को मिलेगी राहत
चैंबर अध्यक्ष ने इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं से संबंधित रिफंड प्रावधानों में प्रस्तावित बदलावों को उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पात्र मामलों में यदि जीएसटी रिफंड 17 दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाता है, तो इससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र की इकाइयों को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
हालांकि, उन्होंने इस व्यवस्था की उपयोगिता को प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध प्रक्रिया और पात्र कारोबारियों तक लाभ पहुंचने से जुड़ा बताया। रिफंड की प्रक्रिया वास्तव में कितनी तेज होती है, यह इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
विदेशी शाखाओं को दी जाने वाली सेवाओं पर भी उठाया मुद्दा
डॉ. जैन ने भारतीय व्यवसायों की ओर से विदेशों में स्थित अपनी शाखाओं या कार्यालयों को दी जाने वाली सेवाओं को निर्यात के रूप में मान्यता देने संबंधी सिफारिश का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही जीएसटी पंजीकरण में स्वचालित प्रक्रियाओं और परिवहन के दौरान मालवाहक वाहनों की जांच को विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर सीमित करने जैसे उपायों को व्यापार सुगमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
छोटे कारोबारियों और एमएसएमई को राहत की उम्मीद
चैंबर अध्यक्ष ने जीएसटी के तहत 10 हजार रुपये तक की कर चोरी के मामलों में अनावश्यक नोटिस एवं कानूनी कार्रवाई से राहत तथा 5 करोड़ रुपये से कम की कर चोरी के मामलों में आपराधिक अभियोजन से संबंधित प्रावधानों में बदलाव को व्यापारिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधानों से छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को राहत मिलने तथा कर प्रशासन में विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने केंद्र सरकार और जीएसटी परिषद से सिफारिशों को शीघ्र प्रभावी बनाने तथा उनके क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, सरल अनुपालन, समयबद्ध रिफंड और कर विवादों का त्वरित समाधान छोटे एवं मध्यम कारोबारियों के लिए विशेष रूप से जरूरी है।
कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कर दरों में सामंजस्य की मांग
डॉ. जैन ने कहा कि जीएसटी दरों के निर्धारण में तैयार उत्पादों के साथ कच्चे माल पर लगने वाली कर दरों पर भी समान रूप से विचार किया जाना चाहिए। कई मामलों में कच्चे माल पर जीएसटी की दर तैयार उत्पाद की तुलना में अधिक होने से उत्पादन लागत बढ़ती है और कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है।
उन्होंने ऐसी विसंगतियों की समीक्षा कर कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कर दरों में उचित सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता जताई, ताकि उद्योगों की लागत प्रतिस्पर्धात्मक बनी रहे।
डॉ. जैन ने कहा कि उद्योग एवं व्यापार जगत को जीएसटी स्लैब में बदलाव की संभावना कम ही थी। ऐसे में कर दरों के सरलीकरण के साथ प्रक्रियागत सुधार, इनपुट टैक्स क्रेडिट की स्पष्टता, समयबद्ध रिफंड और कर विवादों का त्वरित समाधान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित सुधारों का प्रभावी क्रियान्वयन देश में व्यापार एवं उद्योग के विकास, निवेश को प्रोत्साहन और कारोबारी सुगमता को मजबूत करने में सहायक होगा।
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