रायबरेली के तत्कालीन रेलवे गुड्स क्लर्क को रिश्वत मामले में CBI कोर्ट ने 4 साल की जेल की सजा सुनाई। 2017 में 7,200 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
लखनऊ। सरकारी कुर्सी का इस्तेमाल कर रिश्वत मांगना आखिरकार एक रेलवे कर्मचारी को भारी पड़ गया। करीब नौ साल पहले सीबीआई के बिछाए जाल में फंसा रेलवे का गुड्स क्लर्क अब जेल जाएगा। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने रायबरेली के तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब लखनऊ की एक सीमेंट कंपनी ने सीबीआई से शिकायत की थी कि रेलवे में तैनात गुड्स क्लर्क डेमरेज चार्ज कम करने के बदले रिश्वत मांग रहा है। शिकायत के बाद सीबीआई ने ऐसा जाल बिछाया कि आरोपी नोट गिन भी नहीं पाया और रंगे हाथों गिरफ्तार हो गया।
1.26 लाख का चार्ज, 60 हजार की रिश्वत की मांग
जांच के मुताबिक, लखनऊ की मैसर्स आरडी सीमेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड पर रेलवे ने माल उतारने में देरी होने के कारण 1.26 लाख रुपये का डेमरेज चार्ज लगाया था। आरोप है कि तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह ने यह राशि कम कराने के एवज में 60 हजार रुपये रिश्वत मांगी।
बातचीत के बाद सौदा तय हुआ। आरोपी ने कम किए गए डेमरेज चार्ज के साथ शिकायतकर्ता से 7,200 रुपये अवैध रकम लेने पर सहमति जताई। जैसे ही उसने रिश्वत की रकम हाथ में ली, पहले से तैयार बैठी सीबीआई टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
चार्जशीट से सजा तक… नौ साल की कानूनी लड़ाई
सीबीआई ने 13 अक्टूबर 2017 को मामला दर्ज किया और जांच पूरी होने के बाद 30 नवंबर 2017 को आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। लंबी सुनवाई के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुनाई।
रेलवे में रिश्वतखोरी पर CBI की लगातार कार्रवाई
रेलवे में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई लगातार जारी है। हाल ही में एजेंसी ने वाराणसी स्थित नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (NER) के एक सीनियर डिविजनल मैटेरियल्स मैनेजर को भी 1.70 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
आरोप है कि एक निजी फर्म ने रेलवे को करीब 9.47 लाख रुपये का फर्नीचर सप्लाई किया था, लेकिन भुगतान अटका हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि अधिकारी ने बकाया भुगतान जारी करने और भविष्य में भुगतान में सहयोग करने के बदले 1.70 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। इतना ही नहीं, रिश्वत नहीं देने पर भविष्य के ठेके प्रभावित करने की धमकी भी दी गई।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने ट्रैप बिछाया और अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच जारी है।
रेलवे से जुड़े इन दो मामलों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सरकारी व्यवस्था में रिश्वतखोरी के खिलाफ सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और वर्षों बाद भी ऐसे मामलों में दोषियों को सजा से राहत नहीं मिल रही।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
