आओ, कुछ खूबसूरत ख्वाबों को देखें,
सखियों के संग, कुछ कहकहे लगा लें,
कुछ देर तो विश्राम लें, अपने कामों से,
मायके को याद कर थोड़ा मुस्कुरा लें।
Category: साहित्य
खुशियां सजाएं
संत शिरोमणि गुरु रविदास जिहोंने हिन्दू समाज को विघटन से बचाया
सिकन्दर लोदी के शासन में समूचे भारत की अस्पृश्यता अपनी चरम सीमा पर थी तथा उस समय दलित वर्ग के साथ पशुवत व्यवहार हो रहा था। ईश्वर भक्ति, वेदों का पठन-पाठन आदि पर मात्र
चाहत एक हमसफर से…
बात तो तब है जब मैं सुंदर न भी दिखूं,
तब भी वो मुझे उतना ही प्यार करे।
बालों में आयी धीरे-2 सफेदी का मज़ाक न करे
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और मानव का अस्तित्व
आज ‘आर्टिफिशल इंटेलिजेंस’ (AI) के दौर में ऐसा प्रतीत होता है जैसे हमें चुनौती मिल रही है। ‘कृत्रिम बुद्धिमता’ (AI) की चिंताएं स्थापित और जगजाहिर है। बहुत बड़े पैमाने पर डाटा कलेक्ट कर उसका उपयोग रोबोट आदि के
कैसे लिख दूं धूप फागुनी, आज रंगीली है
कैसे लिख दूं धूप फागुनी, आज रंगीली है।
हरिया के छप्पर से महंगी, माचिस तीली है।।
फिर बसंत आया
फिर से महक उठी है बगिया,
खुशियों का हो ज्यों पगफेरा,
नई महक है, रूप नया सा,
नव श्रृंगारित हरित धरा का।
भरतपुर की श्री हिंदी साहित्य समिति को बचाने की मुहिम
श्री हिंदी साहित्य समिति बचाओ मंच के तत्वावधान में इस संस्था को नीलाम होने से बचने की मुहिम चलाई जा रही है। इसे अभियान के तहत मंच की और से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को
अब सुलग रहा मधुमास है…
ईंट पत्थरों की युति पर, अब सुलग रहा मधुमास है। नग्न चिंतनों में लिपटी हर, देह मिली संत्रास है।।
