हर दिन दिवाली

‘असतो मा सदगमय’ यही समझाए
अंधेरे से उजाले की ओर चलते जाएं

 हर दिन दिवाली

‘असतो मा सदगमय’ यही समझाए
अंधेरे से उजाले की ओर चलते जाएं

काव्य साधिका मंच: वाल्मीकि जन्मोत्सव व शरदोत्सव पर हुआ कवि गोष्ठी का आयोजन

काव्य साधिका मंच के तत्वावधान में वाल्मीकि जन्मोत्सव व शरदोत्सव पर कवि गोष्ठी का आयोजन

वो पिता ही है जो…

वो पिता ही है
जो सब कुछ सह जाता है।
तपती धूप में

 कब तक सिसकेगी मानवता…

मेहनतकश को है सज़ा यहां,
नाकारा इज्जत पाते हैं,
खुद का हक है सबको प्यारा

 कब तक सिसकेगी मानवता…

मेहनतकश को है सज़ा यहां,
नाकारा इज्जत पाते हैं,
खुद का हक है सबको प्यारा

पुकार…

हे आशुतोष मुझे अपना लो
अपने जैसा मुझे बना लो

आज की लक्ष्मीबाई…

प्रातः काल जो धधक उठी थी,
क्रोध भरी चिंगारी थी।
मत पूछो वो कौन थी यारो

अपनी कब चली, पता ही नहीं चला…

कैसे कटा
21 से 60 तक का
यह सफ़र,
पता ही नहीं चला।

दौसा के अंजीव अंजुम को हिंदी संस्थान लखनऊ का कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान

दौसा के वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. अंजीव अंजुम को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा संचालित बाल साहित्य संवर्धन योजना के अंतर्गत राज्य के अन्य आठ बाल