टैरिफ की आंधी में भी भारत अडिग | ट्रंप के दबाव के बीच विश्व बैंक ने बढ़ाया ग्रोथ का अनुमान, 7.2% ग्रोथ के साथ भारत सबसे तेज़ दौड़ेगा

ट्रंप के टैरिफ दबाव के बीच विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.2% किया, भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

नई दिल्ली 

जब पूरी दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और व्यापारिक सख्ती से घबराई हुई है, ठीक उसी वक्त भारत के लिए सात समंदर पार से एक ऐसी खबर आई है, जिसने वैश्विक चिंता के माहौल में भरोसे की लौ जला दी है। विश्व बैंक ने अपनी ताज़ा ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स’ रिपोर्ट में भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर ऐसा आकलन पेश किया है, जिसने तमाम आशंकाओं पर विराम लगा दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान है। जून 2025 में यह अनुमान 6.3% था। यानी महज कुछ महीनों में ही 0.9 फीसदी की छलांग, वह भी ऐसे समय में जब ट्रंप ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर चुके हैं।

विश्व बैंक का साफ कहना है कि अमेरिकी टैरिफ हमलों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। जहां चीन की विकास दर के 4.4% तक सिमटने का अनुमान है, वहीं भारत अपनी मजबूत चाल बनाए रखेगा।

रिपोर्ट में भारत की मजबूती के पीछे तीन ठोस वजहें गिनाई गई हैं।
पहली, भारत का सर्विस सेक्टर—जो वैश्विक झटकों के बीच भी लचीला और स्थिर बना हुआ है।
दूसरी, टैक्स सुधार और जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी, जिससे सरकारी खजाने की हालत मजबूत हुई है।
और तीसरी, ग्रामीण इलाकों में आय और मजदूरी में सुधार, जिसने देश की घरेलू मांग को नई ताकत दी है।

विश्व बैंक का आकलन है कि भारत की अर्थव्यवस्था निर्यात पर नहीं, बल्कि घरेलू खपत पर टिकी है। यही वजह है कि अमेरिकी टैरिफ से होने वाला संभावित नुकसान, देश की मजबूत अंदरूनी मांग खुद ही संतुलित कर लेगी।

ईरान को लेकर ट्रंप की नई टैरिफ चेतावनी पर भी रिपोर्ट ने चिंता को काफी हद तक खारिज किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान भारत के शीर्ष 50 व्यापारिक साझेदारों में भी शामिल नहीं है। दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 1.6 बिलियन डॉलर का है, जो भारत के कुल विदेशी व्यापार का सिर्फ 0.15% है। इसके अलावा भारत ईरान को मुख्य रूप से चावल, चाय और दवाओं जैसी मानवीय वस्तुएं निर्यात करता है, जिन पर प्रतिबंधों का असर सीमित रहता है।

ऐसे दौर में जब संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां वैश्विक आर्थिक सुस्ती की चेतावनी दे रही हैं, भारत को विश्व बैंक ने एक ‘ब्राइट स्पॉट’ के रूप में पेश किया है। यही भरोसा आईएमएफ और आरबीआई भी जता चुके हैं।

रिपोर्ट में यह संकेत भी दिया गया है कि अगर अमेरिका के साथ व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनती है, तो भारत की विकास दर मौजूदा अनुमानों से भी कहीं ऊपर जा सकती है।

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