भीलवाड़ा में ACB ने MLV कॉलेज के संस्थापन अधिकारी शिव नुवाल को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। ठेका रद्द न करने के नाम पर मांगी थी घूस। पढ़ें पूरी खबर।
भीलवाड़ा। कॉलेज में सिक्योरिटी गार्ड, कंप्यूटर ऑपरेटर और सफाई कर्मचारियों की सप्लाई का ठेका रद्द होने की कगार पर पहुंचा, तो संस्थापन अधिकारी ने इसे ‘कमाई का मौका’ बना लिया। लेकिन ठेका बचाने के नाम पर 50 हजार रुपये की घूस मांगना अफसर को भारी पड़ गया। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने प्राइवेट अस्पताल के बाहर जाल बिछाकर माणिक्य लाल वर्मा (MLV) राजकीय महाविद्यालय के संस्थापन अधिकारी शिव नुवाल को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया।
चौकीदार की अनुपस्थिति से शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल
मामला भीलवाड़ा के नामी MLV कॉलेज का है:
ठेका रद्द करने की तैयारी: कॉलेज निरीक्षण के दौरान एक चौकीदार अपनी ड्यूटी से गैरहाजिर मिला। इसके बाद कॉलेज प्राचार्य ने संबंधित फर्म का ठेका निरस्त करने की फाइल आगे बढ़ा दी।
अफसर का दांव: ठेका रद्द होने की प्रक्रिया शुरू होते ही संस्थापन अधिकारी शिव नुवाल ने फर्म मालिक को राहत का झांसा दिया। उसने ठेका पहले की तरह जारी रखने के एवज में 50,000 रुपये की घूस मांग ली।
50 हजार से 40 हजार पर आई ‘डील’, ACB ने अस्पताल के बाहर दबोचा
पीड़ित ने घूस देने के बजाय ACB भीलवाड़ा द्वितीय इकाई की शरण ली।
सत्यापन में पुष्टि: शिकायत मिलते ही डीएसपी नरपत सिंह चारण के नेतृत्व में गोपनीय सत्यापन कराया गया, जिसमें 40 हजार रुपये में सौदा तय होने की पुष्टि हुई।
अस्पताल के बाहर ट्रैप: गुरुवार को एसीबी की टीम ने एक निजी अस्पताल के बाहर जाल बिछाया। जैसे ही शिव नुवाल ने परिवादी से 40 हजार रुपये की गड्डी हाथ में थमी, घात लगाए बैठी एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
अन्य मामलों की भी खंगाली जा रही कुंडली
एसीबी अजमेर रेंज के डीआईजी नारायण सिंह टोगस और एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसीबी अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इससे पहले किन-किन फर्मों और ठेकेदारों को डराकर अवैध वसूली की थी।
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