भारतीय वैज्ञानिकों ने नई बैटरी तकनीक विकसित की है, जिससे लिथियम-आयन बैटरी महज एक मिनट से थोड़ा अधिक समय में 80% तक चार्ज हो सकती है। यह तकनीक EV, स्मार्टफोन और लैपटॉप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
नई दिल्ली: स्मार्टफोन की बैटरी खत्म होने की चिंता और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को घंटों चार्ज करने का झंझट अब बीते दिनों की बात होने वाली है। भारत के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई तकनीक विकसित की है, जो बैटरियों की चार्जिंग स्पीड को ‘सुपरसोनिक’ रफ्तार देने वाली है। नए आविष्कार की मदद से लिथियम-आयन बैटरी सिर्फ एक मिनट से कुछ अधिक समय में 80% तक चार्ज हो सकेगी।
किन ‘सुपरमाइंड्स’ ने किया यह कमाल?
इस क्रांतिकारी खोज को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत आने वाले दो बड़े संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर अंजाम दिया है:
IACS (भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ) से डॉ. उर्मिमाला मैत्रा
SNBNCBS (एस. एन. बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र) से डॉ. प्रदीप पचफुले
क्या है यह तकनीक और कैसे काम करती है?
इस जादुई स्पीड के पीछे वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया एक खास ऑर्गेनिक एनोड मटेरियल है, जिसे कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (COF) नाम दिया गया है।
छिद्रयुक्त (Porous) रास्ता: यह मटेरियल जालीदार या छिद्रयुक्त है।
आयनों का सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे: बैटरी के भीतर लिथियम आयन ही ऊर्जा को लाने और ले जाने का काम करते हैं। इस नए कोवेलेंट फ्रेमवर्क के कारण इन आयनों को बहने के लिए एक ‘हाई-वे’ मिल जाता है, जिससे चार्जिंग स्पीड कई गुना बढ़ जाती है।
फास्ट चार्जिंग से क्या बैटरी खराब होगी? जवाब है— ‘बिल्कुल नहीं’
अक्सर देखा जाता है कि फास्ट चार्जिंग से बैटरियां गर्म होती हैं और उनका जीवनकाल छोटा हो जाता है। लेकिन इस स्वदेशी तकनीक की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यही है:
लंबी उम्र और सुरक्षा: वैज्ञानिकों के परीक्षणों में सामने आया है कि लगातार तेज चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के बाद भी न तो बैटरी की क्षमता कम हुई और न ही उसके जीवनकाल पर कोई असर पड़ा। यह पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ है।
स्मार्टफोन से लेकर EV और ‘सोडियम’ क्रांति तक के रास्ते खुले
यह खोज सिर्फ मोबाइल तक सीमित नहीं रहने वाली है, इसके दायरे बहुत बड़े हैं:
इलेक्ट्रिक वाहन (EV): चार्जिंग स्टेशनों पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म होंगी और मिनटों में गाड़ियां फुल चार्ज होकर दौड़ने लगेंगी।
सस्ता विकल्प (सोडियम-आयन): वैज्ञानिकों ने पाया कि यह नया मटेरियल केवल लिथियम ही नहीं, बल्कि सोडियम आयनों को भी आसानी से स्टोर कर सकता है। चूंकि सोडियम (नमक का मुख्य तत्व) दुनिया में प्रचुर मात्रा में और बहुत सस्ता उपलब्ध है, इसलिए भविष्य में बेहद किफायती बैटरियों का निर्माण हो सकेगा।
बड़ी बात: वैज्ञानिकों ने सिर्फ थ्योरी नहीं दी है, बल्कि इस मटेरियल का एक असली वर्किंग बैटरी डिवाइस में सफल परीक्षण करके दिखाया है। भारत का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
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