भरतपुर की रूपवास विधानसभा से तीन बार विधायक रहे निर्भय लाल जाटव का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। गहलोत, टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा ने श्रद्धांजलि दी।
भरतपुर। रूपवास की सियासत में लंबे समय तक अपनी पहचान बनाने वाले पूर्व विधायक निर्भय लाल जाटव का निधन हो गया। 80 साल की उम्र में उनके निधन की खबर सामने आते ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद किया।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने निर्भय लाल जाटव के निधन पर शोक जताया। गहलोत ने उन्हें बयाना-रूपवास क्षेत्र में कांग्रेस का मजबूत स्तंभ बताया।
जनता दल से शुरू हुआ सियासी सफर, फिर कांग्रेस का थामा हाथ
महलपुर काछी गांव निवासी निर्भय लाल जाटव का जन्म 20 सितंबर 1947 को हुआ था। उनके पिता का नाम नत्थी लाल था। रूपवास में शिक्षा हासिल करने वाले निर्भय लाल जाटव की राजनीति की पहचान जमीन से जुड़े नेता के तौर पर रही। उनका राजनीतिक सफर जनता दल से शुरू हुआ। 1990 से 1992 तक वह जनता दल से विधायक रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
कांग्रेस में आने के बाद उन्होंने 1998 का विधानसभा चुनाव पार्टी के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2003 में भी चुनाव मैदान में उतरे और विधायक बने रहे। इस तरह रूपवास विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने तीन बार विधायक के तौर पर प्रतिनिधित्व किया।
2008 में बदल गया रूपवास का सियासी नक्शा
निर्भय लाल जाटव के राजनीतिक सफर की एक खास कड़ी 2008 का विधानसभा परिसीमन भी रहा। उस समय तक रूपवास अलग विधानसभा क्षेत्र था। परिसीमन के बाद रूपवास विधानसभा क्षेत्र को बयाना विधानसभा में मर्ज कर दिया गया।
इसी परिसीमन के दौरान बयाना विधानसभा सीट को अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके साथ ही रूपवास की अलग विधानसभा सीट का अस्तित्व खत्म हो गया।
निर्भय लाल जाटव के निधन के साथ ही रूपवास की उस सियासी पीढ़ी का भी एक अहम चेहरा विदा हो गया, जिसने इस क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
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