पुराने पेंट, दूषित पानी, खिलौनों और कुछ घरेलू उत्पादों से लेड का संपर्क हो सकता है। जानें बच्चों और बड़ों की सेहत पर इसके संभावित असर और बचाव के तरीके।
Health Capsule: हम अपने आशियाने को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव जतन करते हैं—सुरक्षा के ताले, साफ-सुथरा पानी और पौष्टिक खान-पान। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस घर को आप सबसे सुरक्षित मानते हैं, वहीं रोजमर्रा की कुछ चीजें चुपचाप आपके शरीर में जहर घोल रही हैं? दीवारों का पुराना रंग, बच्चों के खिलौने, चमकते गहने और रसोई के कुछ बर्तन अनजाने में लेड (सीसा) जैसी खतरनाक धातु के संपर्क में ला रहे हैं। यह साइलेंट किलर सेहत को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है।
किन चीजों के जरिए शरीर में चुपके से घुस जाता है लेड?
लेड कोई नई बला नहीं है, इसका इस्तेमाल सदियों से होता आया है। आज भी हमारे आस-पास कई ऐसे स्रोत हैं, जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते:
दीवारों का पुराना पेंट: घर की पुरानी हो चुकी दीवारों का रंग जब उखड़ने लगता है, तो उससे उड़ने वाली धूल में लेड होता है।
बर्तन और कॉस्मेटिक्स: कुछ पारंपरिक सिरेमिक बर्तन, सस्ते या नकली गहने, और लोकल कॉस्मेटिक्स इसके बड़े वाहक हैं।
खिलौने और मसाले: बच्चों के रंग-बिरंगे खिलौने और कुछ मसालों व पारंपरिक दवाओं में मिलावट के कारण भी लेड शरीर में पहुंच जाता है।
दूषित मिट्टी और पानी: घर के आसपास की दूषित मिट्टी या पुराना पाइपलाइन का पानी भी इसका कारण बन सकता है।
बच्चों के लिए क्यों है यह सबसे बड़ा खतरा?
बड़ों की तुलना में छोटे बच्चों के लिए लेड किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। इसकी वजह यह है कि बच्चों का दिमाग और नर्वस सिस्टम अभी विकसित हो रहा होता है।
जमीन पर खेलना, चीजों को छूना और फिर उन्हीं गंदे हाथों को मुंह में डाल लेना बच्चों में लेड जाने का सबसे आसान रास्ता है।
थोड़ी सी भी मात्रा बच्चों की याददाश्त, सीखने की क्षमता और उनके व्यवहार पर बुरा असर डाल सकती है।
यहां तक कि गर्भावस्था के दौरान यदि मां इसके संपर्क में आ जाए, तो गर्भस्थ शिशु की सेहत भी दांव पर लग सकती है।
क्या वयस्कों को इससे कोई नुकसान नहीं?
यह सोचना बिल्कुल गलत है कि लेड सिर्फ बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। अगर कोई वयस्क लंबे समय तक इसके संपर्क में रहता है, तो उसे गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं। इसकी वजह से किडनी फेलियर और हार्ट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि लेड पॉइजनिंग के लक्षण तुरंत नजर नहीं आते, और जब तक इसका असर दिखता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
बचाव ही सुरक्षा: अपनाएं ये आसान आदतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लेड के खतरों को लेकर लगातार चेतावनी देता रहा है। थोड़ी सी समझदारी से आप अपने परिवार को इस खतरे से बचा सकते हैं:
गीले पोंछे का इस्तेमाल: घर में रोज झाड़ू लगाने के बजाय गीले कपड़े से सफाई करें ताकि लेडयुक्त धूल हवा में न उड़े।
पुराना पेंट हटाते वक्त सावधानी: दीवारों के पुराने रंग को खुद खुरचकर साफ न करें, इससे जहरीली धूल पूरे घर में फैल सकती है।
क्वालिटी चेक करें: बच्चों के लिए खिलौने, रसोई के बर्तन या कॉस्मेटिक्स खरीदते वक्त हमेशा अच्छे और प्रमाणित ब्रांड्स का ही चुनाव करें।
पानी की जांच: अगर आपको पीने के पानी को लेकर जरा भी शक है, तो उसकी लैब में टेस्टिंग जरूर करवाएं।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें: आपका घर सुकून की जगह होना चाहिए, न कि अनजाने खतरों का अड्डा। आज ही अपने घर की इन छिपी हुई चीजों पर गौर करें और परिवार को सुरक्षित बनाएं।
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