डॉ. विनीता राठौड़ की कविता आवेश में प्रतिक्रिया देने से बचने, धैर्य अपनाने, आत्मनियंत्रण बनाए रखने और रिश्तों को संजोने का संदेश देती है।
क्षणिक भावनाओं में बह जाना
नाहक है अपनी शक्ति गंवाना
फौरी संतुष्टि की चाहत छीने आत्मनियंत्रण
देती अपराध- बोध व पछतावे को निमंत्रण
अच्छा है त्वरित प्रतिक्रिया देने से बचना
धैर्य अपनाना,
आवेग पर लगाम कसना
क्षणिक सुख तजना,
मौन अपनाना
आवेश में बिखर जाने से बेहतर होता
कुछ पल को ठहर जाना
कुछ लम्बी गहरी सांसे लेना
सामान्य विवेक लौटा लाना
आत्मसंतुष्टि का अवसर पा जाना
जीवन भर के पछतावे से बचना
रिश्तों की धरोहर संजोये रखना
आवेश में बिखर जाने से बेहतर होता
कुछ पल को ठहर जाना।
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