बढ़ते ही जाना है…

बाधाएं कितनी भी आएं, कदम रुकने नहीं चाहिए। डॉ. अलका अग्रवाल की कविता संघर्ष, निर्भयता और लगातार आगे बढ़ते रहने का हौसला देती है।