यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग से 9 यात्रियों की मौत हुई। बस पर ₹1.75 लाख के 19 चालान, कम उम्र के चालक और परमिट-रेट्रोफिटिंग उल्लंघन की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही उसका कनेक्शन एक नहीं, बल्कि छह अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से सामने आया है।
ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात स्लीपर बस में लगी आग ने सिर्फ नौ यात्रियों की जान नहीं ली, बल्कि उस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके तहत एक ऐसी बस सड़क पर चलती रही, जिस पर पहले से 19 चालान और करीब ₹1.75 लाख की कार्रवाई दर्ज थी। इनमें कम उम्र के चालक से बस चलवाने, फ्यूल चेंज, रेट्रोफिटिंग और परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बातें सामने आई हैं।
हादसा 23 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के करीब 33वें किलोमीटर पर हुआ। BR32PA8647 नंबर की बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही थी। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई यात्रियों ने खिड़कियों और दूसरे रास्तों से बाहर निकलकर जान बचाई। पुलिस और फायर सर्विस की टीमों ने करीब 20-25 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन नौ लोग बस के भीतर फंस गए और उनकी मौत हो गई।
एक बस… छह राज्यों और क्षेत्रों से जुड़ा पूरा नेटवर्क
इस हादसे के बाद बस की पड़ताल में सामने आई जानकारी इसे सामान्य सड़क हादसे से कहीं ज्यादा गंभीर सवालों के बीच ला खड़ा करती है। बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का रहने वाला बताया गया है। बस का संचालन मध्य प्रदेश से होने वाली राज कल्पना ट्रैवल्स के जरिए बताया जा रहा है। लेकिन बस का रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश में नहीं, बल्कि बिहार के मधुबनी परिवहन विभाग में हुआ था। इसके बाद इसकी फिटनेस का कनेक्शन राजस्थान से और पॉल्यूशन प्रमाणपत्र का कनेक्शन हरियाणा से सामने आता है। बस का रूट नई दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा के बीच था और हादसा उत्तर प्रदेश के जेवर में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ। यानी एक ही बस की कागजी और संचालन संबंधी कहानी में मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश—छह अलग-अलग राज्यों/क्षेत्रों का कनेक्शन सामने आता है।
19 चालान के बाद भी बस क्यों चलती रही?
अब हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बस पहले से ही नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई झेल रही थी, तो उसके संचालन पर रोक क्यों नहीं लगी? उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर बस पर 19 चालान में करीब ₹1.75 लाख की देनदारी बताई गई है। जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने के मामले में चालान हुआ था। जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन के भी चालान दर्ज बताए गए हैं। यानी रिकॉर्ड में केवल एक तरह की गलती नहीं, बल्कि ड्राइवर, वाहन में बदलाव और परमिट—अलग-अलग स्तरों पर नियम उल्लंघन की जानकारी सामने आ रही है।
ऐसे में हादसे के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कार्रवाई सिर्फ चालान काटने तक सीमित रही? अगर वाहन लगातार नियमों के उल्लंघन में सामने आ रहा था तो उसके संचालन को लेकर आगे की कार्रवाई किस स्तर पर हुई?
इंजन से आवाज की शिकायत भी सामने आई
हादसे से पहले बस के इंजन से आवाज आने की शिकायतों का दावा भी सामने आया है। अगर वाहन में तकनीकी खराबी को लेकर पहले से शिकायतें थीं तो जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि उन शिकायतों पर क्या कदम उठाया गया था। आग लगने के कारण को लेकर शुरुआती जानकारी में बस के एसी में स्पार्क या ब्लास्ट के बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे का अंतिम कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
FIR में जलने की बदबू से लेकर आग की लपटों तक की कहानी
इस मामले में यात्री सुनील कुमार की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। सुनील खुद बस में सवार थे। FIR के मुताबिक बस में करीब 30 से 35 यात्री थे। शिकायत में सुनील ने बताया कि जब बस यमुना एक्सप्रेसवे पर करीब 33वें किलोमीटर के पास पहुंची तो ड्राइवर कैबिन की तरफ से जलने जैसी बदबू आने लगी। कुछ यात्रियों ने चालक और परिचालक को इसकी जानकारी दी और बस रोकने को कहा। सुनील का आरोप है कि चालक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि बस में इस तरह की जलने की बदबू आती रहती है।
इसके कुछ देर बाद चालक की सीट के पास अचानक आग की लपटें दिखाई देने लगीं। यात्रियों ने शोर मचाकर बस रोकने को कहा। शिकायत के मुताबिक उस समय भी यात्रियों की बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और उन्हें बस रोकने की बात पर धमकाए जाने का आरोप है। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और बस के अंदर धुआं भर गया। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग किसी तरह बाहर निकल गए, जबकि कुछ यात्री बस के भीतर ही फंस गए। FIR में लगाए गए इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। चालक और परिचालक के खिलाफ दर्ज मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
रात का वक्त… आधे यात्री सो रहे थे
सुनील के बयान में यह भी सामने आया कि हादसे के समय कई यात्री सो रहे थे। रात करीब 11:30 बजे अचानक बस के अंदर आग और धुआं फैलने से यात्रियों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद कम समय बचा। कुछ यात्रियों ने खिड़कियों से बाहर निकलकर जान बचाई। इस अफरा-तफरी के बीच नौ लोग बस के अंदर ही फंस गए। पुलिस के अनुसार मृतकों की मौत आग और दम घुटने से हुई। चालक और परिचालक को बाद में हिरासत में लिया गया। दोनों के नाम पवन और योगेश बताए गए हैं।
चालक-कंडक्टर हिरासत में, मालिक की भूमिका भी जांच का सवाल
आग लगने के बाद चालक और परिचालक के मौके से भागने की बात सामने आई थी। बाद में नोएडा पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। लेकिन जांच की दिशा केवल चालक और परिचालक तक सीमित रहेगी या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। क्योंकि जिस बस पर पहले से 19 चालान दर्ज बताए जा रहे हैं, उसमें कम उम्र के चालक से लेकर फ्यूल चेंज, रेट्रोफिटिंग और परमिट से जुड़े उल्लंघनों की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में बस के मालिक और संचालन व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में आने का सवाल उठ रहा है।
अब असली सवाल—चालान के बाद आगे क्या हुआ?
यमुना एक्सप्रेसवे की इस घटना ने एक बुनियादी सवाल सामने ला दिया है—क्या किसी वाहन पर बार-बार चालान होना ही कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया है? अगर किसी बस पर लगातार नियम उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, तो उसके फिटनेस, परमिट, चालक और तकनीकी स्थिति की दोबारा जांच कब होती है? क्या किसी स्तर पर वाहन को सड़क से हटाने या संचालन रोकने की कार्रवाई की गई थी? अगर नहीं की गई तो क्यों? इन सवालों के जवाब अब इसलिए महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि जिस बस के खिलाफ पहले से कई कार्रवाई दर्ज थीं, वही बस बुधवार रात आग की लपटों में घिर गई और नौ यात्रियों की जान चली गई।
PM मोदी ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख
हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने PMNRF से प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹2 लाख और हादसे में घायल लोगों को ₹50 हजार की सहायता देने की घोषणा की है।
हादसे की जांच जारी है। अब जांच में आग लगने की वजह के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि बस की तकनीकी स्थिति, उसके दस्तावेज, परमिट, फिटनेस, पूर्व के चालान और संचालन व्यवस्था के स्तर पर आखिर कहां चूक हुई।
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