प्रयागराज में सीएम योगी ने माफिया अतीक अहमद के गढ़ ‘कसारी-मसारी’ का नाम बदलकर ‘श्रीकृष्ण पुरी’ किया। अतीक की अवैध जमीन पर बन रहे गरीबों के फ्लैट्स।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। माफिया अतीक अहमद के आतंक के पर्याय रहे कुख्यात इलाके ‘कसारी-मसारी’ का नाम अब हमेशा के लिए बदल दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज के दौरे पर इसका ऐलान करते हुए कहा कि ‘कसारी-मसारी नाम कसाइयों वाला लगता था’ और अब इस पूरे इलाके को नई पहचान देते हुए इसका नाम ‘श्रीकृष्ण पुरी’ कर दिया गया है।
माफिया की जमीनों पर अब गरीबों के आशियाने
नाम बदलने के इस बड़े ऐलान के साथ ही सीएम योगी ने अतीक और उसके गुर्गों के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर बनने वाली एक भव्य आवासीय परियोजना का भूमिपूजन भी किया।
क्या कहा सीएम ने: योगी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक समय था जब माफिया अतीक और अशरफ जिस जमीन पर पैर रख देते थे, वह उन्हीं की हो जाती थी और प्रदेश सरकारें उनके सामने घुटने टेक देती थीं। लेकिन अब सरकार माफिया के कब्जों को नेस्तनाबूद कर वहीं गरीबों के आशियाने बना रही है।
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) की इस मेगा प्रोजेक्ट की खास बातें
माफिया के खौफ को खत्म कर गरीबों को समर्पित इस आधुनिक आवासीय योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
परियोजना का दायरा: PDA द्वारा 9,811 वर्गमीटर क्षेत्र में इस हाई-राइज प्रोजेक्ट को तैयार किया जा रहा है।
14 मंजिला इमारतें: इस जमीन पर 14 मंजिला आधुनिक इमारतें खड़ी होंगी, जिनमें कुल 602 फ्लैट बनाए जाएंगे।
फ्लैट की संरचना: प्रत्येक फ्लैट में 2 बेडरूम, एक शानदार हॉल और किचन की सुविधा होगी। हर फ्लैट का एरिया 56.45 वर्गमीटर तय किया गया है।
हाई-क्लास आधुनिक सुविधाएं: यहां सिर्फ घर नहीं बल्कि आधुनिक शहरों जैसी तमाम सुविधाएं मिलेंगी, जिसमें पार्किंग, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, सोलर सिस्टम, स्विमिंग पूल, कम्युनिटी हॉल और कामर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
इतिहास के पन्नों में दफन हो रहा अतीक का काला साम्राज्य
प्रयागराज का कसारी-मसारी मोहल्ला वही इलाका है, जिसे कभी अतीक अहमद का सबसे सुरक्षित और मुख्य गढ़ माना जाता था। कभी यहीं अतीक का पुराना घर हुआ करता था (जो बाद में चकिया मोहल्ले के नाम से जाना गया)। इत्तेफाक देखिए कि इसी कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में अतीक और अशरफ के साथ उसके पिता को भी दफनाया गया था। अब इस इलाके का नाम बदलकर ‘श्रीकृष्ण पुरी’ करना माफिया के बचे-खुचे साम्राज्य और उसके प्रतीकों को भी नेस्तनाबूद करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
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