जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। शपथ के बाद वे जोधपुर रवाना हो गए।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट को करीब 11 महीने के इंतजार के बाद नियमित मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। सोमवार को जयपुर स्थित लोकभवन में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। जस्टिस अग्रवाल ने अंग्रेजी में शपथ ली और इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया।
शपथ ग्रहण समारोह की औपचारिक शुरुआत मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जारी नियुक्ति का आधिकारिक वारंट पढ़कर करने के साथ की। इसके बाद राज्यपाल ने जस्टिस अग्रवाल को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, अधिकारी, अधिवक्ता और जस्टिस अग्रवाल के परिजन मौजूद रहे।
शपथ के बाद औपचारिकता नहीं, सीधे जोधपुर की राह पकड़ी
मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके तुरंत बाद वे सड़क मार्ग से जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ के लिए रवाना हो गए। उनके साथ जस्टिस विनीत माथुर भी मौजूद रहे। यानी जयपुर में शपथ और मुलाकातों का सिलसिला पूरा होते ही नए मुख्य न्यायाधीश ने बिना किसी देरी के अपनी नई जिम्मेदारी की ओर कदम बढ़ा दिया।
छत्तीसगढ़ से राजस्थान तक पहुंचा लंबा न्यायिक अनुभव
15 जुलाई 1965 को जन्मे जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने वर्ष 1989 में बिलासपुर में वकालत से अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। करीब दो दशक तक वकालत करने के बाद वे न्यायपालिका में पहुंचे।
सितंबर 2013 में उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद मार्च 2016 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। राजस्थान हाईकोर्ट की जिम्मेदारी मिलने से पहले वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे।
उनके पास जटिल मामलों की सुनवाई के साथ-साथ अदालत के प्रशासन, जजों की कार्यप्रणाली और केस रोस्टर मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों का भी अनुभव है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें बड़े कानूनी मामलों में त्वरित और तार्किक फैसलों के लिए जाना गया। अदालती कार्यवाही के दौरान अधिवक्ताओं की दलीलों को धैर्यपूर्वक सुनने की उनकी शैली भी चर्चा में रही है।
31 अगस्त को कॉलेजियम ने की थी सिफारिश
जस्टिस अग्रवाल की राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की प्रक्रिया हाल ही में तेज हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को हुई बैठक में उनके नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ।
राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले करीब 11 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व्यवस्था के बीच प्रशासनिक फैसलों और केस लिस्टिंग को लेकर वकीलों के एक वर्ग में असंतोष की चर्चा रही थी। ऐसे माहौल में नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को हाईकोर्ट के प्रशासन और न्यायिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब 10-11 महीने का कार्यकाल, पेंडिंग मामलों पर रहेगी नजर
जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट की कमान ऐसे समय मिली है, जब अदालत के सामने लंबित मामलों के निपटारे की बड़ी चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे जून 2027 में 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त होंगे। इस लिहाज से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनके पास करीब 10 से 11 महीने का समय रहेगा।
इतने सीमित कार्यकाल में लंबित मामलों के निपटारे के साथ अदालत के प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करना उनके सामने प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
सादगी ने भी खींचा ध्यान
मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के बाद जस्टिस अग्रवाल की सादगी भी चर्चा में रही। वे 6 सितंबर 2026 को बिलासपुर से फ्लाइट के जरिए दिल्ली पहुंचे और वहां से सामान्य तरीके से कार द्वारा जयपुर आए। जयपुर पहुंचने पर उनका हाईकोर्ट गेस्ट हाउस में स्वागत किया गया।
अब राजस्थान हाईकोर्ट की नई जिम्मेदारी संभालने के साथ सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जस्टिस संजय के. अग्रवाल अपने अनुभव का इस्तेमाल अदालत में लंबित मामलों, प्रशासनिक व्यवस्था और केस रोस्टर से जुड़े मुद्दों को किस तरह गति देने में करते हैं।
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