इंद्रजाल …

डॉ. अलका अग्रवाल की कविता ‘इंद्रजाल’ में बदलते बादलों, आकाश, हवा और प्रकृति के मायावी रूप का बेहद सुंदर और भावपूर्ण चित्रण किया गया है। पढ़ें प्रकृति और कल्पना का अनूठा काव्य।

डा.अलका अग्रवाल, सेवानिवृत्त कॉलेज प्राचार्य ,जयपुर

लो चलने लगीं नावें,
आसमान में
कजरारी, काली,
मटमैली, चमकदार
तेज चलती हवा में
पल-पल बदलतीं,
रूप, आकार
फिर से बदल गया रंग
बदल गया ढंग
जैसे फैलाया हो
किसी जादूगर ने इंद्रजाल।

देखते ही देखते,
दृष्टि के दायरे से
दूर, बहुत दूर
सभी नाव
न जाने निकल गईं कहां
शायद जादूगर चल दिया
समेट कर अपना मायाजाल।

—————————

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

अब WhatsApp पर मिलेगा बिजली बिल से लेकर Fire NOC तक सब कुछ | राजस्थान सरकार ने e-Mitra में जोड़ीं 21 नई डिजिटल सेवाएं

60 की उम्र के बाद भी नौकरी का मौका | सरकारी पोर्टल पर बुजुर्गों के लिए 1.68 लाख वैकेंसी, 1.89 लाख ने कराया रजिस्ट्रेशन

बार-बार डॉक्यूमेंट्स देने का झंझट खत्म, क्या आपके पास है यह 14 अंकों का ‘जादुई’ नंबर?

दवा खरीदने से पहले पढ़ लें ये खबर! सरकार ने 39 जरूरी दवाओं की कीमत तय की, अब MRP से ज्यादा वसूली नहीं; डायबिटीज, BP और दिल के मरीजों को बड़ी राहत | यहां देखें पूरी लिस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *