अब छोटे क्लीनिक भी होंगे ‘स्मार्ट’ | ₹299 महीने में मिलेगा डिजिटल हॉस्पिटल सिस्टम, पर्ची से बिलिंग तक सब कुछ ऑनलाइन

केंद्र सरकार ने छोटे क्लीनिकों के लिए ‘ई सुश्रुत क्लिनिक’ डिजिटल हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम लॉन्च किया है। अब मरीजों का रजिस्ट्रेशन, बिलिंग और हेल्थ रिकॉर्ड जैसी सुविधाएं सिर्फ 299 रुपये प्रतिमाह में उपलब्ध होंगी, जबकि पहले तीन महीने सेवा मुफ्त रहेगी।

नई दिल्ली। अब छोटे क्लीनिकों को मरीजों की फाइलों के ढेर, रजिस्टरों और हाथ से लिखी पर्चियों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने छोटे ओपीडी क्लीनिकों के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘ई सुश्रुत क्लिनिक’ नाम का नया हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम लॉन्च किया है। दावा है कि यह कम लागत वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे क्लीनिकों को वही सुविधाएं देगा, जो अब तक महंगे हॉस्पिटल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर में ही उपलब्ध थीं।

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को इस क्लाउड आधारित सिस्टम की शुरुआत की। इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। सरकार का कहना है कि देश के अधिकांश छोटे क्लीनिक अभी भी पूरी तरह मैनुअल व्यवस्था पर काम करते हैं और महंगे डिजिटल सिस्टम उनकी पहुंच से बाहर हैं। ऐसे में ‘ई सुश्रुत क्लिनिक’ इस कमी को दूर करेगा और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को भी गति देगा।

इस प्लेटफॉर्म में मरीजों का ऑनलाइन पंजीकरण, बिलिंग, एमआईएस रिपोर्टिंग, स्पीच-टू-टेक्स्ट, क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और आयुष्मान भारत से जुड़ी जानकारी खोजने जैसी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी। खास बात यह है कि इसे इस तरह तैयार किया गया है कि डॉक्टरों और क्लीनिक स्टाफ को इसे चलाने के लिए किसी विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होगी।

सरकार की योजना इस सिस्टम को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों और निजी क्लीनिकों तक पहुंचाने की है। अभी तक 800 से अधिक स्वास्थ्य संस्थान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं और इसके माध्यम से 680 से ज्यादा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं।

इस सुविधा का उपयोग केवल हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में पंजीकृत डॉक्टर ही कर सकेंगे, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल प्रमाणित चिकित्सकों तक सीमित रहे।

डिजिटल हेल्थ सेवाओं को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और सी-डैक के बीच समझौता भी किया जाएगा। इसके तहत सी-डैक सॉफ्टवेयर का रखरखाव और अपग्रेड करेगा, जबकि एनएचए वित्तीय सहायता, क्लाउड होस्टिंग, मरीजों को भेजे जाने वाले एसएमएस और कॉल सेंटर के माध्यम से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।

सरकार ने इसकी कीमत भी छोटे क्लीनिकों को ध्यान में रखकर तय की है। पांच उपयोगकर्ताओं के लिए इसकी मूल फीस 499 रुपये प्रति माह रखी गई है, लेकिन 200 रुपये की सरकारी सब्सिडी के बाद डॉक्टरों को केवल 299 रुपये प्रति माह का भुगतान करना होगा। इतना ही नहीं, शुरुआती तीन महीने यह सेवा पूरी तरह मुफ्त मिलेगी। यदि पांच से अधिक उपयोगकर्ता जोड़े जाते हैं, तो प्रत्येक अतिरिक्त उपयोगकर्ता पर 50 रुपये प्रति माह का शुल्क देना होगा।

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