अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में चंबल के कुख्यात पूर्व दस्यु सरगना जगन गुर्जर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पुलिस, एफएसएल और जेल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
अजमेर। जिस शख्स का नाम कभी चंबल के बीहड़ों में दहशत की तरह गूंजता था, उसका अंत सोमवार को जेल की चारदीवारी के भीतर हो गया। राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कुख्यात दस्यु सरगना जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उसकी गला घोंटकर हत्या की गई है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद जेल प्रशासन से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मच गया।
जानकारी के मुताबिक, जगन गुर्जर जिस बैरक में बंद था, उसी बैरक में मौजूद एक अन्य हार्डकोर बंदी पर हत्या का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी का नाम कुलदीप जघीना हत्याकांड से भी जुड़ा हुआ है। दोनों बंदी एक ही बैरक में रह रहे थे और सोमवार दोपहर अचानक जेल के भीतर हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़, गणेश राम, डिप्टी नॉर्थ मनीष बडगूजर और सिविल लाइंस थाना प्रभारी शंभू सिंह शेखावत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ जेल पहुंच गए। दूसरी ओर जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर डटे रहे और न्यायिक अधिकारियों को भी सूचना देकर बुलाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल और एमओबी की टीमों को भी जेल परिसर में बुलाया गया। वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए घटनास्थल को सील कर फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट और अन्य महत्वपूर्ण सबूत एकत्र किए गए हैं। पुलिस अब यह जानने में जुटी है कि हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर आखिर ऐसी वारदात कैसे हुई और इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश या साजिश तो नहीं थी।
जगन गुर्जर का नाम कभी चंबल के सबसे चर्चित दस्युओं में गिना जाता था। धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भवुतीपुरा गांव का रहने वाला जगन 1994 में एक हत्या के बाद बीहड़ों में उतर गया था। इसके बाद उसने अपना गैंग बनाया और राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के चंबल क्षेत्र में वर्षों तक आतंक का पर्याय बना रहा।
उस पर हत्या, रंगदारी, फायरिंग और आर्म्स एक्ट समेत 123 से अधिक गंभीर मामले दर्ज बताए जाते हैं। वर्ष 2008 में गुर्जर आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी धमकी देकर सुर्खियां बटोरी थीं। उस दौर में उस पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
लगातार बढ़ते पुलिस दबाव के बीच उसने 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में सचिन पायलट की मौजूदगी में आत्मसमर्पण कर दिया था। हालांकि बाद के वर्षों में भी उसका नाम विवादों और धमकी के मामलों में सामने आता रहा। वर्ष 2022 में एक विधायक को धमकी देने के मामले में वह फिर चर्चा में आया और उसके खिलाफ इनामी घोषणा भी की गई थी।
अब वही जगन गुर्जर, जिसने कभी बीहड़ों में अपना साम्राज्य खड़ा किया था, जेल के भीतर हुई एक रहस्यमय हत्या का शिकार बन गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ जेल के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
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