पांच साल की अनाया मंदिर में भगवान से ऐसी प्रार्थना करती है जिसे सुनकर दादाजी की आंखें भर आती हैं। मासूम बच्ची का अपने पिता के लिए प्यार और इंतजार दिल को छू लेने वाली कहानी बन जाता है।
लघु कथा
डॉ. अलका अग्रवाल, सेवानिवृत कॉलेज प्राचार्य, जयपुर
पांच साल की अनाया अपने दादाजी के साथ मंदिर जा रही थी। लेकिन आज वह ज्यादा ही उदास और चुप थी। दादाजी ने पूछा,’आज हमारी बिटिया की हंसी कहां गुम हो गई ? चलो,चॉकलेट लेते हैं। लेकिन उसने तनिक भी उत्साह नहीं दिखाया। “
दादाजी के साथ अनाया उदास और स्वयं में खोई हुई ही मंदिर गई। वह आंख मूंदकर, हाथ जोड़कर देर तक खड़ी रही।
दादाजी ने उसे गोद में लेकर बहुत प्यार से पूछा, “क्या प्रार्थना की बिटिया ने।” ” मैने भगवान जी से कहा कि इतने दिन हो गए, पापा को आपके पास गए, हम सबको ही पापा की बहुत याद आ रही है। अब तो उन्हें हमारे पास भेज दो भगवान जी।” अनाया ने मासूमियत से बताया। अनाया की प्रार्थना में अपने पापा के प्रति प्यार और दादाजी की बात पर विश्वास को देखकर , दादाजी का भी गला अवरुद्ध हो गया था। दादा और पोती दोनों की आंखों से आंसू बह रहे थे।
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