राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव से पहले बड़ा झटका; आखिर कौन-कौन से अफसर रातों-रात खो देंगे अपनी कुर्सी? पढ़ें आयोग का फरमान…

राजस्थान निर्वाचन आयोग ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले बड़ा आदेश जारी किया है। गृह जिले और तीन साल से अधिक समय से एक ही जगह तैनात अधिकारियों का 15 अगस्त 2026 तक तबादला होगा।

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐसा फैसला लिया है, जिससे आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर तबादलों की सूची सामने आ सकती है। आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले किसी भी अधिकारी की तैनाती ऐसी जगह नहीं रहेगी, जहां उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हों।

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15 अगस्त तक खाली करनी होगी कुर्सी: आखिर किस आधार पर तय हुई अफसरों की विदाई?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब कोई भी अफसर अपने “होम ग्राउंड” पर रहकर चुनाव नहीं करा पाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने तबादलों के लिए 15 अगस्त 2026 की आखिरी तारीख (डेडलाइन) तय कर दी है।

  • गृह क्षेत्र में नो-एंट्री: वे तमाम अधिकारी जो अपने गृह जिले, गृह नगरीय क्षेत्र या गृह पंचायत समिति क्षेत्र में तैनात हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से हटाया जाएगा।

  • 3 साल से जमे अफसरों पर गाज: आयोग ने 30 नवंबर 2026 को कट-ऑफ डेट मानते हुए नियम तय किया है कि जिन अधिकारियों ने पिछले 4 वर्षों में से 3 वर्ष से अधिक का समय एक ही जिले, निकाय या पंचायत समिति में बिताया है, उनका ट्रांसफर अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

कौन-कौन से अधिकारी आ रहे हैं इस ‘रडार’ में? देखें पूरी लिस्ट

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला स्तर से लेकर थाना और तहसील स्तर तक के अफसरों की सूची तैयार की है:

  • जिला व मंडल स्तर: संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, एसपी (SP), एडीएम (ADM), एएसपी (ASP), जिला आबकारी अधिकारी, एसडीएम (SDM), तहसीलदार और डीएसपी (DSP)।

  • जयपुर-जोधपुर कमिश्नरेट: पुलिस आयुक्त (CP), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, डीसीपी (DCP) और एसीपी (ACP)।

  • शहरी निकाय व पंचायत स्तर: नगर निगम/परिषद के आयुक्त, उपायुक्त, नगर पालिका EO, विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अफसर, बीडीओ (BDO), थानाधिकारी (SHO), नायब तहसीलदार, पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) और आबकारी निरीक्षक।


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आयोग ने केवल तबादलों पर ही जोर नहीं दिया है, बल्कि दागी अफसरों पर भी शिकंजा कसा है।विशेष हिदायत: जिन कार्मिकों या अधिकारियों के खिलाफ पिछले चुनावों में लापरवाही के चलते भारत निर्वाचन आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए थे, उन्हें चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े किसी भी पद पर तैनात करने से साफ़ मना कर दिया गया है।

तबादलों पर लगने जा रहा है ‘पूर्ण विराम’: अब सरकार भी नहीं कर पाएगी मनमर्जी

आयोग ने सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि 15 अगस्त तक सभी जरूरी तबादले हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। जैसे ही चुनाव का आधिकारिक टाइम-टेबल घोषित होगा, उसके बाद राज्य सरकार बिना निर्वाचन आयोग की लिखित अनुमति के चुनाव से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं कर सकेगी।

राज्य सरकार के शेड्यूल के मुताबिक पहले नगर निकायों और उसके बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराए जाएंगे। ऐसे में आयोग के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनावी मैदान में प्रशासनिक निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होगा।

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