आवाज के जादूगर और नई हवा के मार्गदर्शक डॉ. सत्यदेव आज़ाद का निधन

अपनी आवाज का लोहा मनवाने वाले उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार डा.सत्यदेव आज़ाद का 88 साल की आयु में राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार दोपहर निथन हो गया। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह नौ बजे मथुरा

अप्रतिम प्रेमी, अजेय योद्धा, परमयोगी श्रीकृष्ण

युगों से अपने बहुआयामी व्यक्तित्व के कारण श्रीकृष्ण लोकमानस को जितना प्रभावित करते रहे हैं, उतना किसी अन्य ने नहीं, यहां तक कि श्रीराम ने

कैसे भुलाएं?

यथार्थ को छैनी से
स्वप्नों को काटा छाँटा

अंगड़ाता है बुढ़ापा यौवन की अर्थी पर…

झंझाओं का महानाद
कवलित काल
ऐसे न थमेगा

हो चुका है प्यार काफ़ी…

फेंक दो
अपनी पुरानी कल्पनाओं के कफ़न कवि!

हो चुका है प्यार काफ़ी…

फेंक दो
अपनी पुरानी कल्पनाओं के कफ़न कवि!

मैं था हवा खोर…

सफ़ेद धुला
मलमल का कुर्ता पहने
मैं टहल रहा था।

मेरी सारी वांछित देह, लांछनों की…

मेरी सारी वांछित देह
लांछनों की
दहकती सलाखों से

मेरी सारी वांछित देह, लांछनों की…

मेरी सारी वांछित देह
लांछनों की
दहकती सलाखों से

दरपन मन टूक टूक हो गया…

कुहरे की छाँव घनी हो गई
पुरबइया नाग फनी हो गई
दरपन मन टूक टूक हो गया