आदमी अब खूब रोता है…

आदमी अब खूब रोता है
मन मसलता है
मांग भर कर मृत्यु की

पुस्तक समीक्षा: वाणी के जादूगर उद्घोषकों के लिए अद्भुत पुस्तक ‘वाक्‌ कला’

कीर्ति, काव्य और ऐश्वर्य की श्रेष्ठता उसके सर्वहिताय एवं मांगलिक प्रयोजन में निहित है। रचनाकार का दृष्टिकोण सर्वभूतहिते होने पर ही उसकी सार्थकता होती है। हिन्दी साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान

संत शिरोमणि गुरु रविदास जिहोंने हिन्दू समाज को विघटन से बचाया

सिकन्दर लोदी के शासन में समूचे भारत की अस्पृश्यता अपनी चरम सीमा पर थी तथा उस समय दलित वर्ग के साथ पशुवत व्यवहार हो रहा था। ईश्वर भक्ति, वेदों का पठन-पाठन आदि पर मात्र

संत शिरोमणि गुरु रविदास जिहोंने हिन्दू समाज को विघटन से बचाया

सिकन्दर लोदी के शासन में समूचे भारत की अस्पृश्यता अपनी चरम सीमा पर थी तथा उस समय दलित वर्ग के साथ पशुवत व्यवहार हो रहा था। ईश्वर भक्ति, वेदों का पठन-पाठन आदि पर मात्र

हिन्दी दिवसः दर्पण देखिए, आइने में निहारिए

जी हाँ, दर्पण देखिए, आइने में निहारिये, मिरर में झांकिए। इंसपैक्शन, निरीक्षण या आडिट दर्पण दिखाने का ही कार्य करता है। वार्षिक सम्मेलन, संगोष्ठी कार्यशाला,

अभिनव आदर्श…

यथार्थ की छैनी
सपनों को काटती है,

त्रय शतक…

तुमको खोला
श्रृंगार शतक सा

सपने अलबेले होते हैं…

आता यथार्थ फन फैलाए ,जीवन का भार न सह पाए

आखिर कैसे गाते…

सम्बन्धों के मधुर गीत, आखिर कैसे गाते

थे धर्मराज…

थे धर्मराज, खेला करते जुआ