भिवाड़ी (Bhiwadi) के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल फैक्ट्री में भीषण विस्फोट और आग से 8 मजदूर जिंदा जल गए। जांच में फैक्ट्री में अवैध पटाखा निर्माण का खुलासा हुआ। रेस्क्यू के दौरान अंदर कंकाल और बिखरे अंग मिले, कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं।
भिवाड़ी
राजस्थान (Rajasthan) के भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह हुए भीषण विस्फोट और आग ने सात मजदूरों को जिंदा निगल लिया। केमिकल फैक्ट्री में अचानक हुए धमाकों के बाद पूरी इमारत आग के गोले में बदल गई, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आग बुझने के बाद अंदर का दृश्य इतना भयावह था कि कई शव कंकाल में तब्दील हो चुके थे और शरीर के अंग अलग-अलग जगहों पर बिखरे मिले।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री कागजों में केमिकल या वस्त्र यूनिट के रूप में पंजीकृत थी, लेकिन अंदर अवैध रूप से पटाखा निर्माण किया जा रहा था। हादसे में गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों को इलाज के लिए एम्स भेजा गया है, जबकि प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर फैक्ट्री संचालकों की भूमिका को संदेह के घेरे में ले लिया है।
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की उस फैक्ट्री में सब कुछ सामान्य था। मजदूर रोज की तरह अपने काम में जुटे थे। लेकिन ठीक 9:30 बजे के आसपास अचानक एक तेज धमाका हुआ… फिर दूसरा… और फिर तीसरा। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरी फैक्ट्री को चंद मिनटों में आग के नरक में बदल दिया।
कुछ ही सेकंड में आग की ऊंची-ऊंची लपटों ने पूरी बिल्डिंग को अपनी गिरफ्त में ले लिया। जो मजदूर गेट के पास थे, वे जान बचाकर भाग निकले, लेकिन अंदर गहराई में काम कर रहे मजदूरों को निकलने तक का मौका नहीं मिला। चीखें, धमाके और आग का विकराल रूप—सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि सात मजदूर वहीं जिंदा जल गए।
जब अंदर पहुंची रेस्क्यू टीम, कांप गई रूह
करीब डेढ़ घंटे तक आग बेकाबू रही। आधा दर्जन दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लगातार पानी की बौछार करती रहीं। जब आखिरकार आग कुछ हद तक काबू में आई और रेस्क्यू टीम अंदर पहुंची, तो वहां का दृश्य देखकर अनुभवी अधिकारियों की भी रूह कांप गई।
फैक्ट्री के फर्श पर इंसानों के पूरे शरीर नहीं, बल्कि उनके जले हुए कंकाल और बिखरे अंग पड़े थे। कई शव इस कदर जल चुके थे कि पहचानना तक मुश्किल हो गया। बचाव दल ने बॉडी पार्ट्स को एक-एक कर पॉलीथीन की थैलियों में इकट्ठा किया। यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
घायल मजदूर जिंदगी और मौत के बीच
विस्फोट और आग में कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें से चार मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें इलाज के लिए दिल्ली एम्स भेजा गया है। वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
घटना के समय फैक्ट्री में कुल 11 मजदूर काम कर रहे थे। कुछ किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन सात मजदूर आग के शिकंजे में फंसकर हमेशा के लिए खामोश हो गए।
केमिकल फैक्ट्री के नाम पर चल रहा था खतरनाक खेल
प्रशासनिक जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जिस फैक्ट्री को कागजों में वस्त्र या केमिकल यूनिट बताया गया था, उसके अंदर अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे।
मौके से भारी मात्रा में बारूद, गंधक-पोटाश और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है। यानी फैक्ट्री के भीतर एक खतरनाक खेल चल रहा था, जिसकी कीमत सात मजदूरों ने अपनी जान देकर चुकाई।
मृतक बिहार के मोतिहारी के रहने वाले
जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मृतक मजदूर बिहार के मोतिहारी के निवासी हैं। पांच मृतकों की पहचान हो चुकी है, बाकी की पहचान प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में 10 से कम मजदूर काम कर रहे थे, इसलिए यह फैक्ट्री अधिनियम के दायरे में नहीं आती थी। मौके से नमूने लेकर एफएसएल जांच के लिए भेजे गए हैं और रीको की ओर से मामला दर्ज कराया जाएगा।
महीनों से बंद फैक्ट्री में कैसे शुरू हुआ काम?
स्थानीय लोगों के अनुसार यह फैक्ट्री कई महीनों से बंद थी, लेकिन अचानक यहां गतिविधियां शुरू हुईं। अंदर बड़ी मात्रा में गत्तों का स्टॉक और विस्फोटक सामग्री रखी गई थी।
सोमवार सुबह अचानक हुए धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई और कुछ ही मिनटों में पूरी फैक्ट्री आग के गोले में बदल गई।
अब जांच के घेरे में फैक्ट्री मालिक
फिलहाल प्रशासन और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि अवैध पटाखा निर्माण कैसे चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
लेकिन इस जांच से अलग, खुशखेड़ा की उस जली हुई फैक्ट्री में अब भी मौत की गंध तैर रही है—जहां कुछ घंटे पहले तक जिंदगी थी, और अब सिर्फ राख, कंकाल और सन्नाटा बचा है।
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