PNB के भीतर ‘60 करोड़ का खेल’, होटल कारोबारी की संपत्ति हड़पने की साजिश, बैंक के 5 बड़े अफसर नामजद

नोएडा (Noida) में PNB के 5 अधिकारियों पर होटल कारोबारी की 60 करोड़ की संपत्ति हड़पने की साजिश का आरोप। कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का केस दर्ज, पुलिस जांच में जुटी।

नोएडा 

देश के बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। इस बार मामला नोएडा का है, जहां बैंक के ही वरिष्ठ अधिकारियों पर एक होटल कारोबारी की करीब 60 करोड़ रुपये की संपत्ति हथियाने की साजिश रचने का आरोप लगा है। सेक्टर-47 निवासी 66 वर्षीय कारोबारी अनिल बब्बर की शिकायत पर कोर्ट के आदेश से नोएडा पुलिस ने PNB के सर्कल हेड, जोनल मैनेजर और शाखा प्रबंधक सहित पांच अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया है।

कहानी की शुरुआत साल 2013 से होती है। अनिल बब्बर ने हरिद्वार स्थित PNB की एक शाखा से होटल खरीदने और उसके संचालन के लिए 9.5 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया। उस समय ब्याज दर 9 प्रतिशत वार्षिक तय हुई थी। कारोबारी का दावा है कि उन्होंने 2016 तक करीब 13 करोड़ रुपये बैंक को चुका दिए, यानी मूलधन से कहीं ज्यादा रकम। यहीं से खेल शुरू हुआ।
पीड़ित के मुताबिक, बिना किसी ठोस आधार के बैंक ने अचानक ब्याज दर 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी और कागजों में उन पर 5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बकाया दिखा दिया गया। जब अनिल बब्बर ने आरटीआई के जरिए जवाब मांगा, तो बैंक टालमटोल करता रहा। दबाव बढ़ने पर बैंक ने अपनी गलती मानी और 2019 में 30.50 लाख रुपये लौटाए, लेकिन बाकी बड़ी रकम कथित तौर पर दबा ली गई।

मामला यहीं नहीं रुका। अनिल बब्बर का आरोप है कि उनका होटल, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करीब 60 करोड़ रुपये है और जिसका रकबा लगभग एक लाख वर्ग फुट है, उसे जानबूझकर कागजों में छोटा और सस्ता दिखाया गया। बैंक रिकॉर्ड में होटल का मूल्यांकन 23 करोड़ रुपये कर दिया गया और रकबा घटाकर महज 67 हजार वर्ग फुट दर्शाया गया।

आरोप है कि अब बैंक अधिकारी SARFAESI Act की आड़ लेकर इस करोड़ों की संपत्ति को अपने किसी चहेते के नाम सिर्फ 20 करोड़ रुपये में नीलाम कराने की तैयारी कर रहे थे। पीड़ित ने इस पूरे मामले को लेकर डेंट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) का भी दरवाजा खटखटाया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार डिफॉल्टर घोषित कर संपत्ति नीलाम करने की धमकियां दी जाती रहीं।

शिकायत में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें सर्कल हेड रविंद्र पांडेय, शाखा प्रबंधक नरेंद्र सिंह बिष्ट, जोनल मैनेजर प्रिय रंजन, जोनल हेड एस.एन. दुबे और एमसीएस हेड मनीष कश्यप शामिल हैं। अनिल बब्बर का दावा है कि इन अधिकारियों ने लोन दस्तावेजों में खुलेआम हेराफेरी की। यहां तक कि बैंक का स्वीकृति पत्र होटल के लेटरहेड पर फर्जी तरीके से तैयार कर लिया गया। नियमों के मुताबिक साल में एक बार बदली जाने वाली रिस्क रेटिंग को 6 साल में करीब 15 बार बदला गया, ताकि लोन को जबरन एनपीए की शक्ल दी जा सके।

अब नोएडा पुलिस यह जांच कर रही है कि बैंक के भीतर यह कथित सिंडिकेट कब से सक्रिय था, और क्या इसी तरह अन्य कारोबारियों को भी निशाना बनाया गया है। यह मामला सिर्फ एक कारोबारी की संपत्ति का नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम के भीतर भरोसे की बुनियाद पर खड़े हो रहे बड़े सवालों का है।

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