नई हवा ब्यूरो | मथुरा
आने वाले कुछ समय में ही भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में वृन्दावन के पास ग्राम सुनरख की 130 हेक्टेयर भूमि पर सौभरि वन (नगर वन) विकसित किया जाएगा। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय प्रजातियों के 76,875 पौधों का वृक्षारोपण किया जाएगा। पौधों के रखरखाव के लिए चयनित स्थल पर प्रजाति वार ब्लॉकों की कांटेदार तारों से बाड़बंदी की जाएगी। इसके अलावा चयनित स्थल पर खम्भों पर कांटेदार तार से घेराबंदी करके 4 वाच टावर भी बनाए जाएंगे। जिनका काम मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण कराएगा।
मथुरा-वृन्दावन के पास विकसित होने वाला यह सौभरि वन प्रदेश का सबसे बड़ा पार्क होगा । सौभरि वन वृन्दावन-मथुरा की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम स्थानीय जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण और वन विभाग द्वारा सामूहिक रूप से किया जाएगा। अभी इस पार्क के लिए जगह को चिन्हित किया गया है। उस पर अवैध कब्जे भी बने हुए हैं। सबसे पहले इन अवैध कब्जों को हटाया जाएगा।
दो साल पहले बना था प्लान
सौभरि वन के विकास का प्लान दो साल पहले बनाया गया था, लेकिन बजट अभाव में यह क्रियान्वित न हो सका। यह अब तक का प्रदेश में सबसे बड़ा वन होगा। वृन्दावन और मथुरा के विकास के लिए बनाई गई इस परियोजना का पर्यावरणीय, पौराणिक और धार्मिक महत्व भी है। सौभरि वन (नगर वन) परियोजना से ईको रेस्टोरेशन, वन्य जीव प्राकृतवास और स्थानीय पर्यावरण स्थल का विकास होगा। भविष्य में इसी वन में बंदरों के रखने की व्यवस्था की जाएगी।
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सौभरि ऋषि की है तपोस्थली
चयनित परियोजना स्थल के एक ओर कोसी ड्रेन और दूसरी ओर यमुना नदी है। बीच का यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की कालीयदह दमन लीला और सौभरि ऋषि की तपोस्थली है। इस कारण चयनित क्षेत्र पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप में काफी अहम है। सुनरख में आज भी सौभरि ऋषि का आश्रम है। विष्णु पुराण, देवी भागवत पुराण एवं श्रीमद् भागवत पुराण के नवे स्कन्द के छठे अध्याय में सौभरि ऋषि के विषय में वर्णन भी है।
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