₹1,000 की पेंशन में कैसे कटेगा बुढ़ापा? | 81 लाख पेंशनभोगी कर्मियों की बढ़ी बेचैनी, अब सरकार से आर-पार

EPS-95 पेंशनभोगियों ने 5 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500, DA, मुफ्त इलाज और Higher Pension लागू करने की मांग तेज हो गई है।

नई दिल्ली। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन लाखों रिटायर कर्मचारियों की मासिक पेंशन आज भी वहीं अटकी हुई है, जहां करीब एक दशक पहले थी। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत देश के करीब 81 लाख पेंशनभोगियों को आज भी न्यूनतम सिर्फ ₹1,000 महीने की पेंशन मिलती है। कई लाभार्थियों के हिस्से में तो औसतन करीब ₹1,171 ही आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी रकम में किसी बुजुर्ग का गुजारा कैसे हो सकता है?

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बढ़ती दवाइयों की कीमत, महंगी चिकित्सा, रोजमर्रा के खर्च और महंगाई के बीच पेंशनभोगियों का कहना है कि मौजूदा पेंशन सम्मानजनक जीवन तो दूर, बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी नाकाफी है। यही वजह है कि न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग वर्षों से लगातार उठ रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है।

इसी नाराजगी के बीच अब EPS-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी ने 5 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि वर्षों से सरकार को ज्ञापन देने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और कई दौर की बातचीत के बावजूद पेंशनभोगियों की प्रमुख मांगें अधूरी हैं।

ये हैं पेंशनभोगियों की चार बड़ी मांगें

पेंशनभोगियों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की है। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA) लागू करने, पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप पात्र कर्मचारियों को उच्च पेंशन (Higher Pension) का लाभ देने की मांग भी की जा रही है।

EPS-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत का कहना है कि करीब 81 लाख पेंशनभोगी एक दशक से अधिक समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार से कई बार आश्वासन मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

इस बीच सरकार के पास पहुंचा बड़ा प्रस्ताव

पेंशन को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू भी चर्चा में है। फिलहाल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों पर EPF और EPS लागू होते हैं। अब इस वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है। अंतिम फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल को लेना है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भविष्य में अधिक कर्मचारियों को EPF-EPS का दायरा मिलेगा और पेंशन व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि, पेंशनभोगियों का कहना है कि नए कर्मचारियों के लिए दायरा बढ़ाना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन जो लोग वर्षों की नौकरी के बाद आज भी ₹1,000 की पेंशन पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं, उनकी समस्या का समाधान सबसे पहले होना चाहिए।

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