जयपुर
CM अशोक गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई कैबिनेट की बैठक में कर्मचारियों से जुड़े कई अहम फैसले किए गए। खुद की CM गहलोत ने ट्वीट कर इन फैसलों की जानकारी शेयर की है। और बताया है कि बैठक में भर्तियों और कर्मचारियों के सर्विस रूल्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए हैं।
गहलोत कैबिनेट में एक अहम फैसला कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर था। कैबिनेट में किए गए फैसले के अनुसार प्रमोशन होने पर कर्मचारी को 1 साल के लिए प्रोबेशन पर रखने के प्रोविजन को अब हटा दिया है। सरकार ने मिसलेनियस सर्विस रूल्स में संशोधन को मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे सभी सेवा नियमों में समानता आएगी।
आपको बता दें कि कार्मिक विभाग ने 2006 में ही नोटिफिकेशन जारी कर प्रमोशन से किसी पोस्ट पर अपॉइंट होने वाले कर्मचारी के लिए 1 साल का प्रोबेशन खत्म कर दिया था। लेकिन मिसलेनियस सर्विस रूल्स में यह प्रोविजन बना हुआ था। जिसे अब हटा दिया गया है।
मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट करते हुए बताया कि मंत्रिमण्डल ने राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम-2007 में संशोधन को स्वीकृति दी है। राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के पदों के कुल 75 प्रतिशत पद वर्तमान में सीधी भर्ती से भरे जाने का प्रावधान है, जिसे कैबिनेट के इस निर्णय से संशोधित किया जाकर सीधी भर्ती एवं पदोन्नति का अनुपात 50-50 किया जा सकेगा। यानी इससे 50 प्रतिशत पदों को एडिशनल तौर पर विकास अधिकारियों के प्रमोशन के जरिए भरा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई केबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय किए गए।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 5, 2022
मंत्रिमण्डल ने राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम-2007 में संशोधन को स्वीकृति दी है।
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सरकार का मानना है कि अब असिस्टेंट और एडिशनल विकास अधिकारी के प्रमोशन के लिए ज्यादा संख्या में पोस्ट उपलब्ध होंगी। विभाग में विकास अधिकारी के खाली पदों को प्रमोशन से जल्द भरा जा सकेगा। साथ ही, लंबे समय से पोस्ट खाली रहने की समस्या दूर होगी। एडिशनल विकास अधिकारियों को विकास अधिकारी के पद पर प्रमोशन देने से ग्राम विकास अधिकारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और उनके मनोबल एवं कार्यकुशलता में भी में बढ़ोतरी होगी।
दंड प्रक्रिया संहिता विधेयक पर होगी चर्चा
कैबिनेट ने दण्ड प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2021 को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी है। इस प्रस्तावित विधेयक से राज्य सरकार को भी केन्द्र सरकार की तर्ज पर सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञों को नोटिफाइड करने की पॉवर मिल जाएंगी। इससे क्रिमिनल केस के इन्वेस्टिगेशन में तेजी आएगी।
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